नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उसके बाद छात्रों में फैले भ्रम और निराशा के बीच एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब देश भर के युवा NEET परीक्षा को लेकर अनिश्चितता और आक्रोश का सामना कर रहे हैं। प्रधान ने अपने इस फैसले को छात्रों के भविष्य की रक्षा और देश की युवा शक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया है।
अस्थिरता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
अपने त्यागपत्र में प्रधान ने लिखा है कि पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देखकर उनका मन बहुत दुखी है। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूँ तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ।” प्रधान ने जोर देकर कहा कि देश की युवा शक्ति ही इस देश की असली ताकत है और वे उसे ‘भ्रम के कुचक्र’ में फंसने नहीं दे सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर और देश में बनी वर्तमान स्थिति का लाभ राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा पाएं, इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को कानूनी पेचीदगियों में उलझने से बचाने और उन्हें पढ़ाई व करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की।
NEET-UG विवाद और सरकार का रुख
प्रधान के इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताएं हैं। हालांकि प्रधान ने अपने बयान में इस बात का जिक्र किया है कि सरकार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की थी। साथ ही, अगले वर्ष से परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में कराने का भी निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि ‘whole of government approach’ के तहत 21 जून 2026 को पुनः परीक्षा आयोजित की गई और परिणाम भी संतोषजनक रहे। लेकिन इसके बावजूद, जिस तरह से कुछ ‘जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों’ ने परीक्षा माफिया के साथ मिलकर छात्रों को गुमराह करने और बाधा डालने की कोशिश की, उससे प्रधान व्यथित नजर आए।
प्रधानमंत्री और सहयोगियों का आभार
अपने त्यागपत्र में प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए एक बड़ा सम्मान रहा। साथ ही उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिनके साथ उन्हें कार्य करने का मौका मिला।
भविष्य की प्रतिबद्धता
शिक्षा क्षेत्र में चार दशकों से अधिक के अनुभव और समर्पण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि उनका विश्वास हमेशा से एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्र की आधारशिला मानने में रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘राष्ट्रसेवा’ उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे इसके लिए हमेशा समर्पित रहेंगे। प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से वे भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखेंगे।
क्या होगा आगे?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर काफी दबाव है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है, तो नए शिक्षा मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती NEET और अन्य परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराना होगा, साथ ही छात्रों में व्यवस्था के प्रति खोया हुआ विश्वास बहाल करना होगा। इस बीच, NEET परीक्षा में कथित धांधली को लेकर छात्रों और अभिभावकों का विरोध प्रदर्शन जारी है, और वे एक निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग कर रहे हैं।

















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