खूंटी : जिले के तोरपा प्रखंड अंतर्गत पड़ा गीढुंग गांव में रविवार की रात एक दर्दनाक हादसा होते-होते टल गया। जंगल से भटककर गांव की सीमा में दाखिल हुए हाथियों के एक झुंड में शामिल नन्हा शावक अचानक 10 फीट गहरे खुले कुएं में गिर गया। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से करीब तीन घंटे चले कड़े मशक्कत के बाद शावक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
रात के अंधेरे में भटककर गांव पहुंचा था झुंड
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, रविवार रात हाथियों का एक झुंड पास के जंगल से निकलकर पड़ा गीढुंग गांव की तरफ आया था। अंधेरा होने के कारण झुंड के साथ चल रहा एक छोटा शावक रास्ते में स्थित बिना मुंडेर के कुएं को नहीं देख सका और सीधे उसमें जा गिरा। शावक के कुएं में गिरते ही वह चीखने-चिल्लाने लगा, जिसकी आवाज सुनकर पास मौजूद हाथियों का झुंड उग्र हो गया और कुएं के चारों तरफ जमा हो गया।
जेसीबी के सामने ढाल बनकर डटे रहे 5 हाथी
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम रेस्क्यू दल और जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची। हालांकि, राहत एवं बचाव कार्य शुरू करना वनकर्मियों के लिए आसान नहीं था। शावक की सुरक्षा को लेकर झुंड के पांच बड़े हाथी कुएं के बिल्कुल करीब डटे रहे। जब भी जेसीबी मशीन कुएं के पास आगे बढ़ने की कोशिश करती, हाथी उसके सामने आकर खड़े हो जाते। हाथियों के इस आक्रामक रुख और अपनी संतान के प्रति संवेदनशीलता को देखते हुए वनकर्मियों को बेहद सतर्कता बरतनी पड़ी।
रैंप बनाकर 3 घंटे में दी गई नई जिंदगी
वन विभाग की टीम ने हाथियों को बिना उकसाए और बिना नुकसान पहुंचाए बचाव कार्य की रणनीति बनाई। जेसीबी की मदद से कुएं के एक हिस्से की मिट्टी को धीरे-धीरे खोदकर ढलान बनाया गया, ताकि शावक स्वयं चढ़कर बाहर आ सके। करीब तीन घंटे तक चले इस सांस रोक देने वाले अभियान के बाद नन्हा शावक सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहा।
जैसे ही शावक कुएं से बाहर आया, वह दौड़कर अपने झुंड से जा मिला। हाथियों ने तुरंत शावक को अपने घेरे में लिया और उसकी कुशल-क्षेम जताते हुए वापस घने जंगल की ओर रुख कर लिया। शावक के सुरक्षित निकलने के बाद वन विभाग और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।













Leave a Reply