नीलांबर-पितांबरपुर (पलामू): गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, पलामू में प्रथम वर्ष के नवागत विद्यार्थियों के लिए आयोजित छह दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम ‘आरंभिका-2026’ का शनिवार को समापन हो गया। कार्यक्रम के छठे और अंतिम दिन छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा के महत्व, तनाव प्रबंधन, बेहतर संचार कौशल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया।
ऑनलाइन पाठ्यक्रमों से बीटेक ऑनर्स की राह आसान: डॉ. योगेश प्रजापति
तकनीकी सत्र के दौरान कॉलेज के आंतरिक वक्ता डॉ. योगेश प्रजापति ने MOOCs, NPTEL और SWAYAM जैसे डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी इन ऑनलाइन माध्यमों से अपनी रुचि के अनुसार तकनीकी ज्ञान और कौशल बढ़ाकर अतिरिक्त क्रेडिट हासिल कर सकते हैं, जिससे उन्हें बीटेक ऑनर्स की डिग्री प्राप्त करने में सीधी मदद मिलेगी।
सकारात्मक सोच और धैर्य से करें तनाव का सामना
तनाव प्रबंधन और संचार कौशल पर आयोजित सत्र में नीरज कमल केरकेट्टा ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय सकारात्मक सोच, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। प्रभावी संचार कौशल करियर में सफलता का मुख्य आधार है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, क्लबों का कराया गया परिचय
सत्र के अंतिम दिन विभिन्न छात्र क्लबों का औपचारिक परिचय कराया गया। आर्ट्स एंड कल्चरल सोसाइटी के तत्वावधान में नवागत छात्रों ने गीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। सोसाइटी प्रभारी प्रो. पंजीत कुमार लेंका ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रचनात्मकता को भी जिंदा रखें। बाहरी दबाव से प्रभावित हुए बिना अपनी रुचि के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करते रहें।
इसके अतिरिक्त: उन्नत भारत अभियान (UBA) सेल विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं का सर्वेक्षण करने और उनके स्थायी तकनीकी समाधान विकसित करने की प्रक्रिया समझाई गई।
विज्ञान एवं नवाचार क्लब छात्रों को वैज्ञानिक प्रयोगों, शोध और प्रोजेक्ट निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया गया।
सफल आयोजन में इनकी रही मुख्य भूमिका
छह दिनों तक चले इस सफल इंडक्शन प्रोग्राम के संरक्षक प्राचार्य प्रो. डॉ. संजय कुमार सिंह, संयोजक डॉ. सुमित कुमार और समन्वयक डॉ. मुरली मनोहर रहे। कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न कराने में आयोजन समिति के सदस्यों, संकाय सदस्यों, छात्र समन्वयकों और स्वयंसेवकों का सराहनीय योगदान रहा।













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