जीरो टॉलरेंस नीति के तहत माफियाओं पर कसेगा शिकंजा; खनन प्रहरियों, एनजीटी और उच्च न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश।
रांची : झारखंड में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और अवैध खनन पर पूर्ण विराम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अवैध माइनिंग, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। राज्य में खनन माफियाओं और अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी 24 जिलों में विशेष जिला स्तरीय टास्क फोर्स (District Task Force) का गठन करने का कड़ा निर्देश दिया है।
झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन से न केवल राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा है। सरकार इस पर पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम करेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रमुख फैसले एवं मुख्य बिंदु:
टास्क फोर्स का गठन: राज्य के सभी 24 जिलों में विशेष टास्क फोर्स का गठन कर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। नए चेकनाके (Checkposts): रांची, लातेहार, गिरिडीह, चाईबासा, लोहरदगा और कोडरमा जैसे प्रमुख जिलों में जांच के लिए स्थाई चेकपोस्ट बनाए जाएंगे।
जब्त वाहनों का निस्तारण: थानों में वर्षों से जब्त खनिजों और वाहनों का नियमानुसार शीघ्र निष्पादन (ऑक्शन/डिस्पोजल) होगा।
कोर्ट व NGT आदेश: उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन अनिवार्य किया गया है।
तकनीक का उपयोग: ड्रोन, जीपीएस और सीसीटीवी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए अवैध माइनिंग पर लगाम लगाई जाएगी।
संवेदनशील जिलों में लगेंगे आधुनिक चेकपोस्ट
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पाया कि रांची, लातेहार, गिरिडीह, चाईबासा, लोहरदगा और कोडरमा जैसे संवेदनशील जिलों में खनिजों के अवैध परिवहन को रोकने के लिए पर्याप्त स्थाई चेकपोस्ट नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के इन सभी जिलों में आधुनिक सुविधाओं से लैस जांच चेकनाका स्थापित करने का आदेश जारी किया। इन चेकपोस्टों पर पुलिस, खान विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की संयुक्त मुस्तैदी रहेगी।
’खनन प्रहरी’ ऐप और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने ‘खनन प्रहरी’ मोबाइल ऐप एवं आम जनता से मिलने वाली शिकायतों की समीक्षा करते हुए कहा कि अवैध खनन या परिवहन से जुड़ी किसी भी शिकायत की जांच में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी मामले या शिकायतें सामने आएं, उन पर तुरंत निष्पक्ष जांच कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
“राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। अवैध खनन से राजस्व की हानि के साथ-साथ पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचती है।”
— हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड)
कानूनी स्रोतों की बढ़ोतरी व थानों से माल का निष्पादन
बाजार में खनिजों (जैसे बालू, गिट्टी व कोयला) की कमी न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री ने ‘लीगल सोर्स’ (वैध स्रोतों) को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि आम जनता को उचित दर पर निर्माण सामग्री मिल सके। इसके साथ ही विभिन्न थाना परिसरों में जब्त पड़े अवैध खनिजों और वाहनों का नियमानुसार त्वरित निस्तारण करने का निर्देश दिया, जिससे थानों में जगह खाली हो और सरकार को राजस्व की प्राप्ति हो सके।













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