दुमका से पहुंचीं बहन मति सोरेन व बड़ी बहन अंजनी सोरेन ने बांधी रक्षासूत्र, सीएम ने अपील की— “स्वदेशी राखी खरीदकर राज्य की बहनों के स्वावलंबन को दें सम्मान”
रांची : श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर रक्षाबंधन का त्योहार अत्यंत उत्साह, आत्मीयता और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को उनकी बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर उनके दीर्घायु, स्वस्थ एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की।
विशेष रूप से दुमका से रांची पहुंचीं उनकी बहन मति सोरेन ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मति सोरेन का अपने भाई के प्रति अपार स्नेह देखने को मिला। उन्होंने अपने हाथों से मुख्यमंत्री को मिठाई भी खिलाई। इस भावुक क्षण पर मुख्यमंत्री ने आत्मीयता व्यक्त करते हुए बहन मति सोरेन का आशीर्वाद लिया तथा उन्हें रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
पारिवारिक स्नेह का विहंगम दृश्य:
मुख्यमंत्री की बड़ी बहन अंजनी सोरेन ने भी उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके अतिरिक्त चचेरी बहनों ने भी राखी बांधकर भाई के प्रति स्नेह जताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की माता रूपी सोरेन सहित परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे।
स्वदेशी एवं स्थानीय राखी की अपील
रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष संदेश भी दिया। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे त्यौहार के अवसर पर सखी मंडल और स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा निर्मित राखियों और सजावटी सामानों की ही खरीदारी करें।
“आपकी एक छोटी सी खरीदारी सिर्फ एक राखी नहीं, बल्कि झारखंड की किसी बहन की लगन, मेहनत और आत्मनिर्भरता का सच्चा सम्मान है। जब हमारी बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तभी राज्य समृद्ध बनेगा।”
— हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड)
सीएम सोरेन ने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह समाज और राज्य के सर्वांगीण विकास की धुरी है। राज्य सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उनके हुनर को बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
राज्यभर में उत्सवी माहौल
इधर, रक्षाबंधन पर पूरे झारखंड में उत्सवी माहौल देखने को मिला। राजधानी रांची सहित जमशेदपुर, धनबाद, पलामू, दुमका और हजारीबाग में बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी दीर्घायु की कामना की। बाजारों में स्थानीय हस्तनिर्मित राखियों की मांग काफी अधिक देखने को मिली, जिससे स्थानीय महिला कारीगरों में भारी उत्साह नजर आया।













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