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लेस्लीगंज : एक तरफ सरकार गरीबों और असहाय परिवारों तक मुफ्त राशन पहुंचाने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक उपेक्षा और विभागीय लापरवाही के कारण लाखों रुपये का अनाज सड़कर बर्बाद हो रहा है। नीलाम्बर-पितांबरपुर (लेस्लीगंज) स्थित विवाह मंडप में पिछले छह-सात वर्षों से रखा ‘अन्नपूर्णा योजना’ का करीब 209 क्विंटल चावल देखरेख के अभाव में पूरी तरह सड़ चुका है और अब इंसानों के खाने योग्य नहीं बचा है।
जिस अनाज को गरीब परिवारों के चूल्हे जलाने के लिए भेजा गया था, वह अफसरों की अनदेखी की भेंट चढ़ गया। 6-7 साल बीत जाने के बाद भी इस अनाज को लाभुकों के बीच बांटना तो दूर, इसकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं निकला। लाखों रुपये के इस अनाज के सड़ जाने से स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति, कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार विभागीय स्तर पर जांच की गई। बड़े-बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, स्थिति का जायजा लिया और फाइलें सजाकर चले गए। लेकिन धरातल पर न तो चावल का उठाव हो सका और न ही इस बर्बादी के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई हुई। जांच के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने 209 क्विंटल चावल की बर्बादी और इसके समय पर वितरण को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) को कई बार लिखित आवेदन भी सौंपा। इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी।
”मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर विवाह मंडप में इतना अनाज सड़ रहा है, तो यह घोर विभागीय लापरवाही का मामला है। इसके लिए जो भी दोषी होंगे, उन पर विभागीय कार्रवाई होना तय है। मैं अपने स्तर से मामले की जांच कराकर आवश्यक कदम उठाऊंगा।”
— जागो महतो, अंचलाधिकारी , नीलाम्बर-पितांबरपुर
अंचलाधिकारी के इस बयान ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि इतने सालों से सरकारी भवन में सड़ रहे अनाज की जानकारी अंचल प्रशासन को कैसे नहीं थी। अब देखना यह होगा कि मामले के उजागर होने के बाद दोषियों पर गाज गिरती है या यह फाइल भी पुरानी जांच रिपोर्टों की तरह दबकर रह जाएगी।













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