जलेश शर्मा
लेस्लीगंज,पलामू : पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के यौम-ए-विलादत (ईद मिलादुन नबी) के मुबारक मौके पर बुधवार को लेस्लीगंज प्रखंड मुख्यालय में भव्य जुलूस निकाला गया।
बुढ़वा बाबा मजार मैदान में जुटा अकीदतमंदों का हुजूम
कार्यक्रम की शुरुआत अहले से ही अकीदतमंद प्रखंड मुख्यालय स्थित अनजान शाहदाता उर्फ बुढ़वा बाबा के मजार शरीफ के प्रांगण में जमा होने लगे। देखते ही देखते पूरा मैदान श्रद्धालुओं से गुलजार हो गया। इसके बाद मजार शरीफ से शुरू हुआ यह रूहानी जुलूस मेन रोड, इराकिया मोहल्ला, मुस्लिम नगर, गांधी चौक और ढेला चौक से गुजरते हुए ढेला तक पहुंचा। पूरे रास्ते दरूद-ओ-सलाम और नात-ए-पाक की सदाओं से माहौल भक्तिमय बना रहा।
जगह-जगह हुआ शानदार स्वागत और लंगर का आयोजन
जुलूस के दौरान जगह-जगह कौमी एकता और खिदमत की मिसाल देखने को मिली:
- स्वागत एवं फूल-वर्षा: अकीदतमंदों पर गुलाब के फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं।
- लंगर व शरबत वितरण: विभिन्न स्थलों पर लंगर का इंतज़ाम किया गया तथा अकीदतमंदों के लिए ठंडा पानी, फल व शरबत बांटे गए।
धर्माचार्यों ने पैगंबर साहब की सीरत पर डाला प्रकाश
जुलूस के पुन: मजार शरीफ मैदान पहुंचने पर एक धार्मिक सभा का आयोजन हुआ, जहां उलेमाओं ने हजरत मुहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन किया:
- हाफिज अशरफ जमाल: “12 रबीउल अव्वल केवल जश्न का दिन नहीं, बल्कि पैगंबर के बताए सच्चाई, अमन और इंसानियत के रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का अवसर है।”
- हाफिज जसीम साहब: “रसूलुल्लाह ने पूरी दुनिया को मोहब्बत, रहम और इंसाफ का संदेश दिया। सच्ची अकीदत यही है कि हम अपने चरित्र में उनके अखलाक को उतारें।”
- मौलाना अख्तर: “आपसी भाईचारा, गरीबों की मदद और पड़ोसियों के अधिकारों की हिफाजत करना ही इस्लाम की असल रूह है।”
- मौलाना ताहिर: “नबी-ए-करीम की जिंदगी पूरी दुनिया के लिए रहनुमाई का जरिया है। युवाओं को सब्र, सच्चाई और सकारात्मक सोच के साथ समाज में मिसाल कायम करनी चाहिए।”
दुआ के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में बारगाह-ए-रिसालत में सलाम पेश किया गया और देश-दुनिया में अमन-चैन, प्रगति और भाईचारे के लिए सामूहिक दुआ मांगी गई।
इस मौके पर वरिष्ठ समाजसेवी तनवीर आलम समेत क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे।













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