कैम्पा शासी निकाय की पहली बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कड़े निर्देश—मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए बनेगी असरदार कार्ययोजना; संवेदनशील इलाकों में थर्मल और इंफ्रारेड कैमरों से रखी जाएगी नजर।
रांची : झारखंड में विकास परियोजनाओं की वजह से वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के प्राकृतिक आवास और गलियारों में पड़ने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक दूरगामी पहल की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित झारखंड प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) की शासी निकाय की पहली उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर संतुलन बनाया जाएगा।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यभर के सभी पारंपरिक हाथी गलियारों (एलीफेंट कॉरिडोर्स) की वैज्ञानिक और सूक्ष्म मैपिंग कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाथियों की आवाजाही वाले रास्तों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण या स्थायी बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी हाथी गलियारे से होकर सड़क या रेल मार्ग का निर्माण अनिवार्य होता है, तो वहां आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का सहारा लेते हुए एलिवेटेड रोड (ऊंची सड़कें) और अंडरपास बनाए जाएंगे, ताकि गाड़ियों की रफ्तार से वन्यजीवों की जीवनरक्षा प्रभावित न हो।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगेगी लगाम
राज्य में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की और वन विभाग को एक व्यावहारिक व असरदार कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जंगलों के भीतर हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक भोजन और पानी की उपलब्धता बढ़ानी होगी। इसके तहत वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के अनुकूल खाद्य, फलदार और औषधीय पौधे बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे। पौधरोपण अभियानों की केवल खानापूर्ति न हो, इसके लिए पौधों की नियमित निगरानी और ट्रैकिंग सुरक्षा की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
हाई-टेक कैमरों और अलर्ट सिस्टम से लैस होंगे संवेदनशील इलाके
बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रामगढ़, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया जैसे अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में हाथियों की आवाजाही पर 24 घंटे नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है।
- थर्मल व इंफ्रारेड कैमरे: जंगलों और बस्तियों के सीमावर्ती इलाकों में थर्मल और इंफ्रारेड कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो घने अंधेरे और कोहरे में भी हाथियों के झुंड की सटीक स्थिति दर्ज करेंगे।
- ध्वनि चेतावनी यंत्र (साउंड अलार्म): हाथियों के रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचते ही स्वचालित सायरन और ध्वनि चेतावनी प्रणाली सक्रिय हो जाएगी।
- रियल-टाइम मोबाइल अलर्ट: हाथियों की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों के मोबाइल पर तुरंत वास्तविक समय (रियल-टाइम) में एसएमएस और चेतावनी संदेश भेजे जाएंगे, जिससे जान-माल के नुकसान को समय रहते रोका जा सके।
सरकार के इस कदम से न केवल जंगलों से सटे ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल खत्म होगा, बल्कि हाथियों के संरक्षण की दिशा में भी झारखंड एक नई मिसाल पेश करेगा।













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