नीलाम्बर पिताम्बरपुर (पलामू): तरहसी प्रखंड क्षेत्र की सेलारी पंचायत के ग्रामीणों पर प्राकृतिक आपदा और प्रशासनिक उपेक्षा की दोहरी मार पड़ी है। पंचायत भवन के समीप से बहने वाले बहेरा खाला के टेढ़वा नाला पर ग्रामीणों द्वारा अपने कठिन परिश्रम और चंदे के बल पर निर्मित अस्थायी पुल पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गया। नाले के उफान में पुल का ढांचा ताश के पत्तों की तरह बह गया, जिससे स्थानीय लगभग 100 परिवारों का संपर्क मुख्य मार्ग और प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है।
सालों पुराना दर्द, सरकारी वादों की खुली पोल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस विकट समस्या से वर्षों से जूझ रहे हैं। हर बार बारिश के मौसम में उन्हें जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। ग्रामीणों ने इस बुनियादी सुविधा के लिए पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर क्षेत्रीय विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता तक कई बार चक्कर लगाए और गुहार लगाई, लेकिन कागजी दावों के इतर धरातल पर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
सरकारी उपेक्षा पर भारी पड़ा था जन-सहयोग
जब सिस्टम और जनप्रतिनिधियों से निराशा हाथ लगी, तो ग्रामीणों ने हार नहीं मानी। उन्होंने आपस में चंदा जुटाया और खुद श्रमदान कर मिट्टी व पत्थरों से अस्थायी पुल सह सड़क का निर्माण शुरू किया। ग्रामीणों की इस पहल को देखते हुए स्थानीय विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता ने भी अपने व्यक्तिगत स्तर से मिट्टी-मोरम उपलब्ध करवाकर मार्ग को समतल कराने का प्रयास किया था। हालांकि, बुनियादी ढांचे की मजबूती न होने के कारण बारिश के तेज पानी के बहाव ने ग्रामीणों की महीनों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
100 से अधिक घरों के सामने आजीविका व आपात स्थिति का संकट
पुल बह जाने के कारण सबसे बुरा असर विद्यार्थियों, दैनिक मजदूरों और मरीजों पर पड़ा है। स्कूली बच्चों का विद्यालय जाना बंद हो गया है, वहीं आपातकालीन स्थिति में किसी मरीज को अस्पताल पहुंचाना लगभग असंभव हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन और अन्य आवश्यक सामानों के लिए भी अब जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना मजबूरी बन गई है।
स्थायी पुल निर्माण की उठी पुरजोर मांग
क्षेत्रीय लोगों ने पलामू जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण विभाग से स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मौका मुआयना करने और टेढ़वा नाला पर एक उच्चस्तरीय पक्के पुल (RCC Bridge) के निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।













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