मूसलाधार बारिश के बाद जलजमाव से बेहाल हुए पुलिसकर्मी,
गश्ती वाहन और जब्त गाड़ियां पानी में डूबीं
प्रशासनिक दावों और जलनिकासी व्यवस्था की खुली पोल
मेदिनीनगर ( पलामू ): जिले में हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिस महकमे की भी कमर तोड़ दी है। लगातार हुई तेज बारिश के कारण पलामू के तरहसी थाना परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया और देखते ही देखते एक बड़े तालाब में तब्दील हो गया।
परिसर में घुटनों से ऊपर तक भरे पानी के कारण न केवल पुलिसकर्मियों की दिनचर्या ठप हो गई, बल्कि थाने में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज, फाइलें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और परिसर में पार्क की गई पुलिस गाड़ियां भी पानी में डूब गईं। स्थिति यह हो गई कि दूसरों की सुरक्षा और मदद करने वाली पुलिस खुद इस प्राकृतिक और प्रशासनिक लापरवाही से पैदा हुई आफत से जूझती नजर आई।
- जलमग्न थाना परिसर: बारिश और आसपास के नालों का पानी बैक मारने से पूरा थाना परिसर 2 से 3 फीट तक पानी में डूब गया।
- वाहनों का भारी नुकसान: पुलिस की गश्ती गाड़ियां (स्कॉर्पियो/जीप) और विभिन्न मामलों में जब्त कर रखी गई दर्जनों बाइक व गाड़ियां पानी में जलमग्न हो गईं।
- दस्तावेज़ों पर मंडराया संकट: मुंशी कक्ष, वायरलेस रूम और मालखाने तक पानी घुसने से एफआईआर (FIR) रजिस्टरों और केस फाइलों को बचाने के लिए जवानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
- फरियादी परेशान: परिसर में भीषण जलभराव के कारण शिकायत लेकर आने वाले आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।
- ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी: स्थानीय प्रशासन द्वारा मानसून पूर्व नालों की सफाई के दावों की पोल खुल गई।
1. तालाब जैसा नजारा, आपात सेवाएं प्रभावित
बारिश का सिलसिला शुरू होते ही आसपास के मुख्य नालों का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सीधे थाना परिसर में समा गया। कुछ ही घंटों में पूरा परिसर झील जैसा दिखने लगा। थाने के मुंशी रूम, बैरक, थाना प्रभारी के कार्यालय और आगंतुक कक्ष तक पानी पहुंच गया। परिसर में खड़ी इमरजेंसी रेस्पॉन्स (112) और गश्त लगाने वाली गाड़ियाँ पहियों के ऊपर तक डूब गईं। वाहनों पर पानी चले जाने के कारण गश्ती अभियान और आपातकालीन पुलिस सेवाओं पर सीधा असर पड़ा।
2. फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बचाने में जुटे जवान
थाना परिसर में पानी भरते ही ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी जान-माल और सरकारी संपत्ति को बचाने में जुट गए। मालखाने और रिकॉर्ड रूम में रखी कई महत्वपूर्ण पुरानी फाइलें, केस डायरियां और रजिस्टर पानी की जद में आने लगे थे, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने आनन-फानन में अलमारियों के ऊपर और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। शॉर्ट-सर्किट के खतरे को देखते हुए वायरलेस सेट, कंप्यूटर और बिजली के कनेक्शन तुरंत काट दिए गए।
थाने में जलजमाव के चलते अपनी शिकायतें दर्ज कराने आए आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। थाने के मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक पानी भरा होने के कारण फरियादी अंदर जाने से कतराते रहे। जब पुलिस खुद ही पानी निकालने और अपने सामान को सुरक्षित करने में उलझी रही, तो आम जनता की सुनवाई पूरी तरह से प्रभावित रही। गनीमत यह रही कि पूरे थाने परिसर में पानी भर जाने के कारण कोई भी शिकायत करता थाने परिसर के अंदर गया ही नहीं क्योंकि थाने परिसर में 1 से 2 फीट के बीच पानी भरी हुई थी
4. व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब पलामू में थोड़ी सी बारिश के बाद सरकारी परिसरों में पानी भरा हो। मानसून से पहले नाला सफाई और जल निकासी के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन थोड़ी सी बारिश में थाना परिसर का यह हाल होना प्रखंड प्रशासनिक तैयारी की पोल खोलता है। नाले-नालियों की सही समय पर सफाई न होना और अतिक्रमण ही इस भीषण जलजमाव का मुख्य कारण बना।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया एवं राहत कार्य
घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। जल निकासी के लिए पम्प सेट और सक्शन मशीनों का सहारा लिया जा रहा है।
“अत्यधिक बारिश और आसपास के जलस्तर में वृद्धि के कारण थाना परिसर में पानी घुसा है। हमारी प्राथमिकता फाइलों और वायरलेस सिस्टम को सुरक्षित करना था, जिसे कर लिया गया है। पंप के जरिए पानी निकाला जा रहा है ताकि सेवाएं जल्द से जल्द सामान्य की जा सकें।”
पुलिस पदाधिकारी
जिस पुलिस तंत्र पर संकट के समय जनता की सुरक्षा का जिम्मा होता है, यदि वही बुनियादी ढांचे की बदहाली का शिकार होकर ‘बेहाल’ हो जाए, तो यह प्रखंड प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। तरहसी थाना में परिसर मे जल निकासी का स्थायी समाधान न निकाला गया तो हर मानसून में पुलिस और जनता दोनों को इसी तरह की फजीहत झेलनी पड़ेगी।













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