24 दिनों से जारी उग्र प्रदर्शन के बाद 5 घंटे चली कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला; 2014 के बाद की सभी परीक्षाओं की होगी उच्चस्तरीय CID-SIT जांच, नए सुधारों के लिए अमिताभ कौशल समिति गठित।
रांची। राज्य में पिछले 24 दिनों से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ जारी छात्रों के अभूतपूर्व और उग्र आंदोलन के आगे अंततः राज्य सरकार को झुकना पड़ा है। सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित लगभग पांच घंटे लंबी विशेष कैबिनेट बैठक में परीक्षा प्रणाली को लेकर कई कठोर और ऐतिहासिक फैसले लिए गए। विवादों के घेरे में आई JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग – कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल) परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही, काली सूची में डाली गई आउटसोर्सिंग एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. (TDPL) द्वारा वर्ष 2014 से लेकर अब तक आयोजित सभी परीक्षाओं, उनके परिणामों और उनके आधार पर की गई सभी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया है।
कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने माना कि परीक्षा संचालन की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में गंभीर त्रुटियां हुई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। एसआईटी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले तथ्यों के आधार पर यह कड़ा कदम उठाया गया है।”
कैबिनेट के 4 बड़े फैसले:
- JSSC-CGL परीक्षा निरस्त: सितंबर 2024 में आयोजित परीक्षा में व्यापक धांधली के आरोपों के बाद पूरी परीक्षा रद्द।
- TDPL पर पूर्ण प्रतिबंध: विवादित एजेंसी TDPL द्वारा 2014 से आयोजित सभी परीक्षाएं, रिजल्ट व अनुशंसित नियुक्तियां निरस्त।
- जांच का दायरा बढ़ा: 2014 के बाद से JSSC व JPSC द्वारा आयोजित सभी संदेहास्पद परीक्षाओं की जांच CID और SIT करेगी।
- सुधार समिति का गठन: वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कमेटी गठित; जनता व अभ्यर्थियों से सुझाव मांगने के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च।
राजधानी में जश्न का माहौल, लेकिन CBI जांच पर अड़े छात्र
सरकार की घोषणा के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और लालपुर चौक पर पिछले तीन हफ्तों से अनशन पर बैठे हजारों अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। देर शाम स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और दीपिका पांडे सिंह ने अनशन स्थल पर पहुंचकर 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
हालांकि, ‘JPSC-JSSC न्याय मंच’ ने स्पष्ट किया कि यह केवल आंशिक जीत है। छात्र नेताओं ने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) को नहीं सौंपी जाती, उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।
नियुक्त कर्मचारियों में बढ़ा आक्रोश
दूसरी ओर, सरकार के इस फैसले से पूर्व में TDPL के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। देर रात सैकड़ों कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के बाहर मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि निष्पक्ष प्रक्रिया और कोर्ट की निगरानी के बाद उन्होंने नौकरी हासिल की थी, और सरकार के एक फैसले से सैकड़ों परिवार सड़क पर आ गए हैं।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष (भाजपा) ने इसे छात्रों के संघर्ष की जीत बताते हुए सरकार से सवाल किया कि वह सीबीआई जांच कराने से क्यों कतरा रही है। इससे पूर्व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया था।













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