रांची : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सख्त पाबंदी और मानसून सीजन के दौरान नदियों से बालू उठाव पर पूरी तरह रोक के बावजूद रांची जिले के राहे थाना क्षेत्र अंतर्गत पोगड़ा इलाके में अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों की मानें तो पोगड़ा स्थित राढ़ू नदी के घाटों को छलनी कर रोजाना बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से बालू निकाला जा रहा है।
पोकलेन और जेसीबी से कट रही नदी की छाती
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि खनन माफिया रात के अंधेरे में ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी भारी मशीनों (पोकलेन और जेसीबी) के जरिए राढ़ू नदी से बालू का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इस घाट से प्रतिदिन औसतन 30 हजार क्यूबिक फीट (सीएफटी) बालू निकाला जा रहा है। इस बालू की ढुलाई के लिए रोजाना 60 से 70 ट्रैक्टरों का काफिला नदी तट से लेकर डंपिंग यार्डों तक लगातार दौड़ रहा है।
गांवों की गलियों से रांची तक ‘सफेद सोने’ का जाल
नदी से निकाला गया बालू पहले ट्रैक्टरों के जरिए बदालू, पांचू, नवाडीह और पोगड़ा के आसपास बनाए गए अवैध डंपिंग साइटों पर जमा किया जाता है। इसके बाद, जैसे ही रात गहराती है, बड़े हाइवा वाहनों के जरिए इसे मुख्य मार्गों और गांवों के अंदरूनी रास्तों से होते हुए रांची व आसपास के शहरी इलाकों में ऊंचे दामों पर सप्लाई कर दिया जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही से न केवल गांव की सड़कें जर्जर हो रही हैं, बल्कि हादसों का डर भी बना रहता है।
पुलिस का इनकार, लेकिन सुलगते सवाल
इस पूरे खेल में ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस और कतिपय रसूखदार नेताओं की साठगांठ व राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, राहे थाना प्रभारी ने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध बालू खनन से साफ शब्दों में इनकार किया है। उनका कहना है कि राढ़ू नदी में कोई खनन नहीं हो रहा है और जब भी कोई सूचना मिलती है, पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है।
थाना प्रभारी के इस दावे के उलट, स्थानीय लोगों का सवाल जायज नजर आता है: “अगर नदी में खनन नहीं हो रहा है, तो राहे की सड़कों और ग्रामीण रास्तों पर रोजाना 60-70 बालू लदे ट्रैक्टर और दर्जनों हाइवा कहां से आ रहे हैं और किसकी अनुमति से दौड़ रहे हैं?”
एनजीटी के नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां यह दर्शाती हैं कि खनन माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर धरातल पर जांच रिपोर्ट तैयार करता है या यह मामला कागजी दावों और बयानों में ही सिमट कर रह जाएगा।













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