नीलांबर-पितांबरपुर (पलामू): लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के झरहा में पीडीएस अंत्योदय वितरण प्रणाली का 14 बोरी सरकारी चावल बरामद होने के तीन दिन बाद भी पुलिस में प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकी है। प्रशासनिक ढिलाई और रात के अंधेरे में सील गोदाम खोले जाने की शिकायतों ने अब पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है। स्थानीय ग्रामीणों के बीच कार्रवाई को रफा-दफा करने की चर्चाएं तेज़ हैं।
क्या है पूरा मामला?
गुरुवार को झरहा स्थित एक दुकान और मकान पर अंचलाधिकारी जागो महतो, अंचल निरीक्षक (सीआई) नरेंद्र कुमार और प्रखंड खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी नारायण महतो की संयुक्त टीम ने छापेमारी की थी। इस दौरान मौके से पीडीएस का 14 बोरी अवैध चावल बरामद किया गया था। कार्रवाई के बाद सीओ के निर्देश पर संबंधित गोदाम को सील कर दिया गया था।
रात में गोदाम खोलने और साक्ष्य मिटाने का आरोप
गोदाम सील होने के बावजूद गुरुवार की ही रात ताला खोलकर अंदर रखी बोरियों को बदलने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास करने का मामला सामने आया है। जब गोदाम प्रशासनिक निगरानी में था, तो रात में इसे किसके इशारे पर खोला गया और बोरियों में हेरफेर किसके स्तर से हुआ, इसे लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
टालमटोल या आश्वासन?
मामले को लेकर जब प्रशासनिक अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने एफआईआर में हो रही देरी की अलग-अलग वजहें बताईं, लेकिन रात में गोदाम खोले जाने के सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
“प्राथमिकी दर्ज कराने का स्पष्ट निर्देश दिया जा चुका है। हर हाल में आज ही एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी।” — अंचलाधिकारी
नारायण महतो प्रखंड खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी “ज़ब्ती सूची तैयार की जा रही है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है। मामला गुरुवार की ही तारीख में दर्ज कराया जाएगा।”
पारदर्शिता पर उठते गंभीर सवाल
सरकारी अनाज की अवैध ज़ब्ती और अधिकारियों की मौजूदगी के बाद भी तीन दिनों तक मामला अटका रहना कई सवाल खड़े करता है जब गुरुवार को ही ज़ब्ती हुई थी, तो ज़ब्ती सूची बनाने में 72 घंटे का समय क्यों लग रहा है?
सील किए गए गोदाम को रात में खोलने की हिम्मत किसकी हुई और प्रशासन ने इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया?
क्या खाद्य सामग्री की कालाबाजारी करने वाले सिंडिकेट को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस एफआईआर न होना प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्षेत्र की जनता अब देखना चाहती है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है या यह मामला महज़ आश्वासनों की बलि चढ़ जाएगा।













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