मेदिनीनगर (पलामू): जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने और दूर-दराज के क्षेत्रों तक चिकित्सीय सुविधाएं पहुँचाने के प्रयासों का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। पलामू जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जहाँ संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) का आँकड़ा 95 प्रतिशत तक पहुँच गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजनाओं और जमीनी अभियानों की नियमित समीक्षा के बाद यह सुखद तस्वीर सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग की हालिया समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने पाया कि पिछले कुछ समय में ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के बीच जागरुकता बढ़ी है। घर पर असुरक्षित प्रसव कराने की परिपाटी पर काफी हद तक लगाम लगी है, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता मिली है।
सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं का मिला मज़बूत साथ
प्रशासन की ओर से संस्थागत प्रसव को शत-प्रतिशत तक पहुँचाने के लिए एक विशेष रणनीति के तहत काम किया जा रहा है।
- जागरूकता अभियान: स्वास्थ्य सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से गाँव-गाँव में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को जागरूक किया जा रहा है।
- समय पर पंजीकरण: गर्भवती महिलाओं का समय पर एएनसी (प्रसव पूर्व जाँच) पंजीकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि जोखिम वाले मामलों की पहचान पहले ही की जा सके।
- अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था: प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिलाओं को अविलंब निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस और परिवहन सुविधाओं की निगरानी बढ़ाई गई है।
विविध स्वास्थ्य कार्यक्रमों की व्यापक समीक्षा
समीक्षा बैठक में केवल संस्थागत प्रसव ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अन्य प्रमुख संकेतकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई:
- टीकाकरण अभियान: नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के नियमित और शत-प्रतिशत टीकाकरण पर ज़ोर दिया गया।
- परिवार नियोजन: परिवार नियोजन के विभिन्न साधनों और परामर्श सेवाओं की पहुँच को ग्रामीण क्षेत्रों में और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए।
- टीबी नियंत्रण कार्यक्रम: जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत मरीजों की पहचान, मुफ्त दवाओं के वितरण और पोषण सहायता (निक्षय पोषण योजना) की स्थिति की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
बैठक के अंत में संबंधित पदाधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को कड़े निर्देश जारी किए गए कि वे बची हुई 5 प्रतिशत आबादी तक भी अपनी पहुँच बनाएँ। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य सिर्फ 95% पर रुकना नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत संस्थागत प्रसव का आँकड़ा हासिल करना है।
“मातृ एवं नवजात शिशु की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। 95% संस्थागत प्रसव एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन हमारा प्रयास पलामू के हर एक दूरस्थ गाँव तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना है।”
— स्वास्थ्य विभाग, पलामू
आगे की राह
स्वास्थ्य विभाग की इस उपलब्धि को पलामू के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सदर अस्पताल से लेकर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बिस्तरों की संख्या, दवाओं की उपलब्धता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति को और बेहतर करने की योजना है, ताकि नवजात शिशुओं और माताओं को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवा मिल सके।













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