मेदिनीनगर (पलामू): झारखंड के सुदूरवर्ती और कभी नक्सली दहशत के लिए पहचाने जाने वाले मनातू क्षेत्र से आज बदलाव की एक ऐसी गूंज उठी है, जिसने न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता का दिल जीत लिया है। सामुदायिक पुलिसिंग (Community Policing) की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए मनातू पुलिस ने यह साबित कर दिया है कि ‘कलम’ की ताकत ‘बंदूक’ के खौफ पर भारी पड़ती है।
शत-प्रतिशत रहा परिणाम: सभी 25 छात्र हुए सफल
मनातू थाना परिसर में संचालित ‘निशुल्क कोचिंग केंद्र’ के लिए इस बार का इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम खुशियों की सौगात लेकर आया है। इस केंद्र से शिक्षा प्राप्त करने वाले सभी 25 छात्र-छात्राओं ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी में सफलता हासिल कर 100% रिजल्ट दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि ये बच्चे उन परिवारों से आते हैं जहाँ दो वक्त की रोटी के लिए भी कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।
रेशमी कुमारी ने गाड़े सफलता के झंडे
इस सफलता की सबसे चमकदार तस्वीर छात्रा रेशमी कुमारी के रूप में सामने आई है। रेशमी ने साइंस स्ट्रीम में 70 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रखंड का नाम रोशन किया है।
”मेरे पिता मजदूर हैं। हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं शहर जाकर निजी कोचिंग ले सकूँ। थाना प्रभारी निर्मल उरांव सर के मार्गदर्शन और मुफ्त शिक्षा ने मेरा सपना टूटने से बचा लिया।”
— रेशमी कुमारी, सफल छात्रा
थाना प्रभारी बने ‘गुरुजी’: वर्दी का दिखा मानवीय चेहरा
इस पूरी अनूठी पहल के पीछे मनातू थाना प्रभारी निर्मल उरांव की दृढ़ इच्छाशक्ति रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी के बीच, उन्होंने समय निकालकर स्वयं 11वीं और 12वीं के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
नियमित कक्षाएं: थाना परिसर के भीतर ही क्लासरूम तैयार किया गया।
- अनुशासन का पाठ: पुलिस की देखरेख में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन और समय प्रबंधन का प्रशिक्षण मिला।
- स्कूलों में भी सक्रियता: श्री उरांव केवल थाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे ग्रामीण स्कूलों में भी जाकर घंटीवार (Period-wise) कक्षाएं लेते थे।
विश्वास का सेतु: पुलिस और जनता के बीच बदली धारणा
कभी पुलिस के नाम से घबराने वाले इस नक्सल प्रभावित इलाके के ग्रामीण अब पुलिस को अपने ‘सहयोगी’ और ‘शिक्षक’ के रूप में देख रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस पहल ने न केवल बच्चों का भविष्य संवारा है, बल्कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच के विश्वास को भी मजबूत किया है।
एक नई शुरुआत की उम्मीद
आज भले ही निर्मल उरांव का तबादला हो चुका हो, लेकिन मनातू के लोगों के दिलों में उनके प्रति सम्मान कम नहीं हुआ है। उनकी इस ‘अनूठी पहल’ ने मेहनत का जो रंग दिखाया है, वह आने वाले वर्षों में क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। प्रशासन की इस सकारात्मक पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के माध्यम से ही नक्सलवाद जैसी समस्याओं की जड़ों पर प्रहार किया जा सकता है।













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