मेदिनीनगर : तरहसी प्रखंड मुख्यालय एवं पंचायत क्षेत्र से महज कुछ ही दूरी पर स्थित मुख्य मार्ग की जर्जर स्थिति और भीषण जलजमाव ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लंबे समय से उपेक्षा का शिकार यह सड़क अब पूरी तरह तालाब का रूप ले चुकी है, जिसके विरोध में आज ग्रामीणों ने बीच सड़क पर धान रोपकर अपना अनोखा और उग्र विरोध दर्ज कराया।
सालों से बदहाल सड़क, गड्ढों में तब्दील मुख्य मार्ग
प्रखंड का यह बेहद महत्वपूर्ण मार्ग लंबे समय से बदहाली के आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह इतने बड़े और गहरे गड्ढे बन गए हैं कि अब यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। जलजमाव और कीचड़ के कारण पैदल चलना तो दूर, दोपहिया और चार पहिया वाहनों का गुजरना भी दुर्घटनाओं को निमंत्रण देने जैसा है।
दैनिक आवागमन ठप, जनजीवन अस्त-व्यस्त
इस मुख्य मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं स्कूल और कॉलेज जाते हैं। इसके अलावा मरीज, किसान, मजदूर, व्यापारी और आम ग्रामीण इसी रास्ते से सफर करते हैं। सड़क की इस जर्जर हालत के कारण आए दिन लोग फिसलकर गिरते हैं और चोटिल होते हैं। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
“आश्वासन नहीं, अब स्थायी समाधान चाहिए”
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और प्रतिनिधियों को बार-बार स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर भी दिखा कि प्रखंड मुख्यालय के इतने करीब होने के बावजूद अधिकारियों और प्रतिनिधियों की नजर इस बदहाली पर नहीं पड़ रही है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब उन्हें झूठे दिलासे नहीं, बल्कि सड़क और नालियों के निर्माण का स्थायी समाधान चाहिए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों ने दिया समर्थन
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठन के प्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों के सुर में सुर मिलाया। मौके पर चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोपाल प्रसाद, सांसद प्रतिनिधि अनिल सिंह, तरहसी पंचायत के उप मुखिया सुधीर यादव, सामाजिक कार्यकर्ता उज्जवल पांडे और समाजसेवी लड्डू रजक सहित भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि विकास के दावे तभी सार्थक होंगे जब जनता को मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षित आवागमन मिलेगा। यदि शीघ्र ही सड़क निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो ग्रामीण आने वाले दिनों में और तीव्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।













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