मेदिनीनगर ( पलामू ) : गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी), पलामू में नवनामांकित प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आयोजित बहुप्रतीक्षित इंडक्शन प्रोग्राम ‘आरम्भिका 2026’ के चौथे दिन विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सत्रों का आयोजन किया गया। दिन भर चले कार्यक्रमों में मुख्य रूप से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, तकनीकी नवाचार, साहित्यिक अभिरुचि और सामाजिक उत्तरदायित्व के विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
योग और अनुशासित दिनचर्या से ही संभव है सर्वांगीण विकास: राजीव शरण
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड ग्रामीण बैंक के सेवानिवृत्त अधिकारी तथा पतंजलि परिवार, पलामू के जिला प्रभारी सह झारखंड राज्य कार्यकारिणी सदस्य श्री राजीव शरण रहे। वर्ष 2006 से योग शिक्षक एवं प्रशिक्षक के रूप में समाज सेवा कर रहे श्री शरण ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सफल करियर के लिए शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का बेहतर संतुलन आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए विभिन्न योगासनों के व्यावहारिक लाभ बताए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमित योग और अनुशासित दिनचर्या न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि एकाग्रता बढ़ाकर मानसिक तनाव को दूर करने में भी सहायक होती है।
नवाचार और स्टार्टअप से समाज की समस्याओं का समाधान खोजें: डॉ. मुरली मनोहर
स्वास्थ्य सत्र के उपरांत संस्थागत नवाचार परिषद (IIC 8.0) के तहत एक विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को नवाचार (इनोवेशन), उद्यमिता (एंट्रप्रेन्योरशिप), स्टार्टअप संस्कृति, डिजाइन थिंकिंग, समस्या निवारण तकनीक, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) तथा पेटेंट प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार की प्रमुख पहलों जैसे युक्ति-कपिला योजना और स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन (SIH) के बारे में जानकारी प्रदान की गई। आईआईसी के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर ने नवोदित इंजीनियरों का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने नए विचारों को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि उनका उपयोग समाज की व्यावहारिक समस्याओं के अभिनव समाधान विकसित करने में करें।
रचनात्मकता और सामाजिक सरोकार पर जोर
दिन के उत्तरार्ध में संस्थान के साहित्यिक क्लब द्वारा एक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से अपने विचारों को स्पष्टता से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया गया।
तत्पश्चात सामाजिक संगठन ‘उड़ान भारत’ के प्रतिनिधियों ने अपने सत्र में जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा और सहायता के लिए चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों की जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ संवेदनशील नागरिक बनने का संदेश दिया।
संयोजकों की सराहनीय भूमिका
कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने रेखांकित किया कि एक बेहतर इंजीनियर बनने के लिए केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, लीक से हटकर सोचने की क्षमता और समाज के प्रति दायित्व बोध का होना भी उतना ही आवश्यक है।
‘आरम्भिका 2026’ के चौथे दिन के सफल संचालन एवं आयोजन में इंडक्शन प्रोग्राम के संयोजक डॉ. सुमित कुमार एवं समन्वयक डॉ. मुरली मनोहर की मुख्य भूमिका रही। कार्यक्रम में कॉलेज के संकाय सदस्य, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।













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