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वसंत में आहार से लेकर दिनचर्या में परिवर्तन जरूरी

मार्च और अप्रैल का महीना बीमारियों वाला होता है। इस वक्त मौसम तेजी से बदलता है और सर्दी से गर्मी की तरफ बढ़ता है।  

मार्च और अप्रैल को वसंत ऋतु का समय माना जाता है। हेमंत और शिशिर ऋतु में बदलाव के बाद वसंत ऋतु का आगमन होता है। जहां हेमंत और शिशिर ऋतु में कफ जमने की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं वसंत ऋतु में शरीर में जमा कफ तेजी से पिघलने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, सुस्ती, पाचन की कमजोरी और भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में आहार और दिनचर्या में भी परिवर्तन लाना जरूरी है।

आयुर्वेद मानता है कि वसंत ऋतु में सुबह हल्दी उठने और व्यायाम करने के बहुत सारे फायदे शरीर को मिलते हैं। अगर इस मौसम में सही खान-पान और दिनचर्या अपनाई जाए, तो शरीर संतुलित रहता है और मौसमी बीमारियों से बचाव हो सकता है। पहले जानते हैं कि आहार में क्या परिवर्तन लाया जाए।

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आहार में कफ को कम करने वाली चीजों को शामिल करें और कोशिश करें कि आहार कड़वा और कसैला हो। माना जाता है कि वंसत में खाया गया कड़वा और कसैला भोजन पूरे साल शरीर को सेहतमंद रखता है। आहार में नीम के पत्ते, पुराना गेहूं, मूंग दाल और जौ को शामिल करें। जितना हो सके पानी को उबाल कर पिएं क्योंकि वसंत के महीने में मच्छर भी बढ़ जाते हैं और बीमारियां जल्दी लगने लगती हैं।

वसंत के महीने में कुछ चीजों का परहेज करना भी जरूरी है। आहार में मीठा, खट्टा, और खारी चीजों का सेवन कम करें। घी, तेल से बनी मीठी चीजों का सेवन न करें। वसंत ऋतु में दही न खाने की भी सलाह दी जाती है। दही की जगह छाछ पी सकते हैं। छाछ का सेवन काले नमक और जीरा पाउडर के साथ ही करें। इससे शरीर में कफ नहीं जमता है। वसंत के महीने में दिन में न सोने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि दिन में सोने से शरीर में कफ की मात्रा बढ़ती है और शरीर भारी और सुस्त महसूस होता है।

Pic Credit : ANI

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