बकरी शेड में रहने को मजबूर गरीब मजदूर परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़; आवास योजना और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत उजागर
मेदिनीनगर ( पलामू ) : राज्य में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के भले ही बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों, लेकिन पलामू जिले के मनातु प्रखंड से आई इस हृदयविदारक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। मनातु क्षेत्र के तेतरडीह गांव में एक अत्यंत गरीब मजदूर परिवार के दो मासूम बच्चों की विषैले करैत सांप के काटने से एक की मौत हो गई। जब की एक का नवजीवन अस्पताल मे इलाज चल रहा है घटना के बाद बदहवास माता-पिता अपने बच्चों की जान बचाने के लिए दर-दर भटकते रहे, लेकिन अत्यधिक आर्थिक तंगी और बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण एक बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। सुरेन्द्र भुइयाँ – तेतरडीह, थाना – मनातु, जिला – पलामू (झारखंड) जो आवास नहीं मिलने की वजह से बकरी सेड में रहकर अपना जीवन बसर कर रहा था
रात 2 बजे घर में घुसा मौत का सन्नाटा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेन्द्र भुइयाँ का परिवार अपने कच्चे व असुरक्षित घर (बकरी शेडनुमा आशियाने) में सोया हुआ था। रात के लगभग 2 बजे एक जहरीले करैत सांप ने उनके दोनों मासूम बच्चों को डस लिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर परिजनों की नींद खुली तो देखा कि कमरे में सांप मौजूद था और दोनों बच्चों की हालत तेजी से बिगड़ने लगी थी।
आवास योजना से वंचित, बकरी शेड में गुजार रहे थे जिंदगी
ग्रामीणों ने बताया कि सुरेन्द्र भुइयाँ का परिवार बेहद गरीब है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं—जैसे ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ या राज्य सरकार की ‘अबुआ आवास योजना’—आज तक इस निर्धन परिवार तक नहीं पहुंच सकीं। परिवार टूटे-फूटे कच्चे मकान और बकरी शेड जैसी असुरक्षित जगह में रात काटने को मजबूर था। यही कच्चा और असुरक्षित घर अंततः उनके मासूम चिरागों के लिए काल बन गया।
इलाज के लिए दर-दर भटके लाचार माता-पिता
सांप के डसने के बाद बदहवास माता-पिता अपने अचेत बच्चों को लेकर गांव व आसपास के डॉक्टरों तथा अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण परिवार तुरंत आपातकालीन वाहन या बेहतर चिकित्सा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सका। सही समय पर एंटी-वेनम और त्वरित इलाज न मिल पाने से एक मासूमों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
प्रशासनिक संवेदनहीनता पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश की लहर है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें भले ही ‘अंतिम व्यक्ति तक योजना पहुंचाने’ की बात करें, लेकिन धरातल पर सुरेन्द्र भुइयाँ जैसे जरूरतमंदों को न रहने को पक्का घर मिल रहा है और न ही समय पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं।
ग्रामीणों की मांग:
- आपदा राहत कोष से त्वरित मुआवजा: पीड़ित भुइयाँ परिवार को सरकारी नियमानुसार तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।
- पक्का आवास की स्वीकृति: परिवार को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी पक्का आवास आवंटित किया जाए।
- स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम की उपलब्धता: ग्रामीण व सुदूर इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश की दवा (Anti-Snake Venom) चौबीसों घंटे उपलब्ध कराई जाए।













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