रात में खाना खाते समय भरभराकर गिरी मिट्टी की दीवार; सरकारी आवास योजना का लाभ न मिलने से उजड़ा आशियाना, ढहे मकान में रहने को मजबूर
नीलाम्बर-पीताम्बरपुर (पलामू): मानसून की शुरुआती हल्की बारिश ने ही प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। लेस्लीगंज प्रखंड की जामुनडीह पंचायत अंतर्गत फुलांग गांव में सोमवार देर रात एक गरीब और असहाय विधवा का आशियाना जमींदोज हो गया। वर्षों पुराने जर्जर मिट्टी के घर की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे तीजो कुँअर का परिवार बेघर हो गया है। गनीमत यह रही कि हादसा उस वक्त हुआ जब पूरा परिवार जाग रहा था और रात का खाना खा रहा था, जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया।
भोजन के दौरान चीख-पुकार, ग्रामीणों ने निकाला बाहर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात तीजो कुँअर अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर के भीतर खाना खा रही थीं। इसी दौरान बारिश के कारण सीलन खा चुकी मिट्टी की दीवार अचानक ढह गई। तेज आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। हालांकि, तब तक परिवार के सदस्य मुस्तैदी दिखाते हुए किसी तरह मलबे के बीच से बाहर निकल चुके थे।
ग्रामीणों ने बताया कि यदि यह हादसा परिवार के सोने के बाद हुआ होता, तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था। इस दुर्घटना में कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन परिवार की गृहस्थी का सारा सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया है। सिर छुपाने का कोई अन्य साधन न होने के कारण पीड़ित परिवार इस भीषण गर्मी और बारिश के बीच उसी ढहे हुए मकान के अवशेषों में रहने को विवश है।
योजनाओं की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। पीड़ित तीजो कुँअर एक असहाय विधवा हैं, जो लंबे समय से जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर थीं। विडंबना यह है कि सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ और ‘अंबेडकर आवास योजना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद आज तक उन्हें एक पक्का मकान नसीब नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जो लोग वास्तव में पात्र और जरूरतमंद हैं, वे आज भी पक्की छत के लिए तरस रहे हैं। यह हादसा सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
“तत्काल सहायता संभव नहीं, आवेदन पर होगी कार्रवाई”
“फिलहाल तत्काल प्रभाव से आवास की सहायता दिया जाना संभव नहीं है। यदि पीड़िता लिखित आवेदन देती हैं, तो नियमानुसार ‘अंबेडकर आवास योजना’ के तहत प्रक्रिया शुरू कर मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।”
— प्रखंड पीएम आवास समन्वयक
प्रखंड विकास पदाधिकारी का फोन बंद
मामले पर प्रखंड प्रशासन का पक्ष जानने के लिए प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) जागो महतो से कई बार दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
ग्रामीणों व प्रतिनिधियों ने उठाई प्राथमिकता पर आवास देने की मांग
घटना की सूचना मिलते ही सांसद प्रतिनिधि बंटी सिंह, पंचायत के पूर्व मुखिया भोला नाथ साहू, पूर्व मुखिया प्रमोद सिंह सहित कई गणमान्य लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और पलामू उपायुक्त से मांग की है कि पीड़ित विधवा महिला को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ‘अंबेडकर आवास योजना’ या किसी अन्य आपातकालीन योजना से पक्का मकान स्वीकृत किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते ऐसे जर्जर मकानों का सर्वे कराकर जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध करा दे, तो भविष्य में होने वाली संभावित त्रासदियों से बचा जा सकता है।













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