लोहरसी में अंचल अधिकारी ने गाया लोकगीत; दिव्यांगता को मात दे पांकी और रामगढ़ में बढ़ा रहे मतदाताओं की भागीदारी
पांकी (पलामू) : सरकारी अभियानों को जनता तक पहुंचाने के लिए अक्सर प्रशासनिक कड़कपन देखने को मिलता है, लेकिन पलामू जिले के पांकी और रामगढ़ अंचल के प्रभारी अंचल अधिकारी (सीओ) मारवाड़ी साहू ने इसके उलट एक बेहद अनूठी और दिल छू लेने वाली मिसाल पेश की है। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची के ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ अभियान को सफल बनाने के लिए वे खुद गांव-गांव घूम रहे हैं और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नागपुरी गीतों का सहारा ले रहे हैं। स्थानीय भाषा और संगीत के इस अनूठे कॉम्बिनेशन ने ग्रामीणों को इस कदर प्रभावित किया है कि अब इस अभियान में लोगों की भागीदारी तेजी से बढ़ने लगी है।
बुधवार को पांकी अंचल के लोहरसी क्षेत्र में आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम के दौरान सीओ मारवाड़ी साहू का यह अनोखा रूप खुलकर सामने आया। उन्होंने मंच से जब नागपुरी सुरों में समां बांधा, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गीत के जरिए समझाया ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ का महत्व
सीओ मारवाड़ी साहू ने पारंपरिक नागपुरी गीतों की तर्ज पर खुद के बनाए संदेशों के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया कि मतदाता सूची में सुधार और नाम दर्ज कराना क्यों जरूरी है। उन्होंने बेहद सरल और स्थानीय लहजे में ‘एसआईआर’ की पूरी प्रक्रिया और खुद से जानकारी दर्ज करने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) के फायदों के बारे में बताया।
ग्रामीणों के बीच बैठकर, उन्हीं की भाषा में संवाद करने के इस अनूठे प्रयास की हर तरफ सराहना हो रही है। कार्यक्रम में मौजूद महिला, पुरुष और युवाओं ने न सिर्फ उनके गीतों का आनंद लिया, बल्कि मतदाता सूची को अद्यतन करने का संकल्प भी लिया।
स्थानीय भाषा और संस्कृति से जुड़ती है जनता: सीओ
अपने इस नवाचार पर बात करते हुए अंचल अधिकारी मारवाड़ी साहू ने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में जब हम शुद्ध प्रशासनिक या तकनीकी भाषा का उपयोग करते हैं, तो आम जनता और प्रशासन के बीच एक दूरी महसूस होती है। इसके विपरीत, जब हम उनकी अपनी भाषा, संस्कृति और गीतों के माध्यम से बात रखते हैं, तो लोग सहजता से बात को समझते हैं और खुद आगे बढ़कर सहयोग करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शत-प्रतिशत सटीक और त्रुटिहीन बनाना है, जो बिना जन-भागीदारी के संभव नहीं है।
दिव्यांगता को मात दे निभा रहे दोहरे अंचलों की जिम्मेदारी
बता दें कि मारवाड़ी साहू ने महज १५ दिन पहले ही रामगढ़ अंचल में अपना पदभार ग्रहण किया है। इसके तुरंत बाद प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए उन्हें पांकी अंचल का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद उनके हौसले और कर्तव्यनिष्ठा में कोई कमी नहीं दिखती। वे रोजाना सुदूर ग्रामीण इलाकों का दौरा कर रहे हैं। उनका सहज व्यवहार और संवेदनशील जनसंपर्क शैली पलामू के ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई इबारत लिख रही है।
ग्रामीणों में भारी उत्साह
“हमने पहली बार किसी अधिकारी को इस तरह हमारे बीच बैठकर गाते और समझाते देखा है। साहब ने जिस तरह नागपुरी में पूरी बात समझाई, उससे हमारे सारे संशय दूर हो गए। अब हम सब अपने परिवार का डेटा खुद सही करवाएंगे।” — स्थानीय ग्रामीण, लोहरसी क्षेत्र
प्रशासन को उम्मीद है कि सीओ मारवाड़ी साहू के इस कलात्मक और संवेनदनशील प्रयास से पांकी और रामगढ़ अंचल में एसआईआर और मतदाता पुनरीक्षण कार्य को न सिर्फ रफ्तार मिलेगी, बल्कि यह पूरे पलामू जिले के लिए एक रोल मॉडल साबित होगा।













Leave a Reply