पलामू के नावाबाजार में घरेलू विवाद के बाद खौफनाक कदम; दोनों बच्चियों की मौत, तीसरी ने भागकर बचाई जान, आरोपी मां गिरफ्तार
मेदिनीनगर (पलामू) जिले के नावाबाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत कंडा गांव से एक ऐसी दिलदहला देने वाली और आत्मघाती घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। बुधवार की रात एक मां ने पारिवारिक कलह और सामाजिक प्रताड़ना से तंग आकर अपनी ही दो मासूम बेटियों को कुएं में फेंक दिया और फिर खुद भी मौत की छलांग लगा दी। इस दर्दनाक घटना में दोनों अबोध बच्चियों की कुएं में डूबने से मौत हो गई, जबकि ग्रामीणों की तत्परता से महिला को जिंदा बाहर निकाल लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मृत बच्चियों की पहचान प्रिया कुमारी और डॉली कुमारी के रूप में हुई है।
सास की गोद से छीना, तीसरी बेटी किसी तरह जान बचाकर भागी
पुलिस की शुरुआती जांच और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार की रात कंडा गांव निवासी छोटेलाल प्रजापति और उसकी पत्नी सरिता देवी के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई थी। विवाद इतना बढ़ गया कि सरिता देवी मानसिक संतुलन खो बैठी। आरोप है कि उसने गुस्से में आकर अपनी सास की गोद से एक मासूम बेटी को जबरन छीना और घर के पास स्थित कुएं में फेंक दिया। इसके तुरंत बाद उसने अपनी दूसरी बेटी को भी कुएं में धकेल दिया।
खौफनाक मंजर यहीं नहीं रुका, सनकी मां ने अपनी तीसरी बेटी को भी कुएं में फेंकने का प्रयास किया, लेकिन वह बच्ची किसी तरह उसकी गिरफ्त से छूटकर भागने में सफल रही, जिससे उसकी जान बच गई। इसके बाद सरिता देवी ने खुद भी कुएं में छलांग लगा दी। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद महिला को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक दोनों मासूमों की सांसें थम चुकी थीं।
तीन बेटियां होने पर प्रताड़ना का आरोप, जांच में जुटी पुलिस
इस खौफनाक कदम के पीछे की जो कड़वी हकीकत ग्रामीणों द्वारा बताई जा रही है, वह बेहद परेशान करने वाली है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि छोटेलाल और सरिता के बीच अक्सर झगड़ा होता था। सरिता के लगातार तीन बेटियां होने के कारण ससुराल और परिवार में उसे लगातार मानसिक ताने सुनने पड़ते थे और प्रताड़ित किया जाता था। आशंका जताई जा रही है कि इसी सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, नावाबाजार थाना प्रभारी संजय कुमार यादव ने कहा कि महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और इन सभी आरोपों की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है।
विशेष संपादकीय विश्लेषण: ‘बेटी बचाओ’ के नारों के बीच सामाजिक खोखलेपन का कड़वा आईना
सरकारी योजनाएं बनाम रूढ़िवादी सोच
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ जैसे दावों के बीच हमारे समाज के भीतर छिपे गहरे खोखलेपन को उजागर करती है। एक तरफ जहां आधी आबादी को सशक्त बनाने के सरकारी प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ आज भी जमीनी स्तर पर बेटियों के जन्म को बोझ या अभिशाप मानने वाली दकियानूसी सोच कई घरों को लील रही है।
यदि पुलिस जांच में यह साबित होता है कि सरिता देवी को लगातार बेटियों के जन्म के कारण प्रताड़ित किया जा रहा था, तो यह केवल एक परिवार का अपराध नहीं, बल्कि हमारे पूरे समाज की सामूहिक विफलता मानी जाएगी। हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी प्रताड़ना के एवज में दो मासूम और बेकसूर बच्चियों की क्रूर हत्या को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। कानूनन यह एक अक्षम्य और संगीन अपराध है।
इस त्रासदी से उठते कुछ अनुत्तरित सवाल:
- क्या २१वीं सदी के डिजिटल भारत में भी बेटियों के जन्म पर बहुओं को प्रताड़ित करने वाली मानसिकता जीवित है?
- घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना से जूझ रही महिलाओं की पहचान करने और उन्हें समय पर काउंसिलिंग देने वाला सामाजिक ढांचा विफल क्यों साबित हो रहा है?
- क्या हमारी स्थानीय पंचायतें, महिला समितियां और ग्रामीण प्रशासन ऐसे संकटग्रस्त परिवारों की पहचान कर समय रहते हस्तक्षेप नहीं कर सकते थे?
कंडा गांव की यह घटना यह सबक देती है कि सिर्फ कानून बनाने या वित्तीय योजनाएं लागू करने से समाज नहीं बदलेगा। जब तक बेटियों को लेकर हमारी सोच और परिवारों के भीतर का माहौल सुरक्षित व सम्मानजनक नहीं होगा, तब तक ऐसी त्रासदियों पर पूरी तरह रोक लगा पाना मुमकिन नहीं है। माता-पिता के विवाद की बलि चढ़ीं इन दो मासूमों की मौत पूरे समाज से आत्ममंथन की मांग कर रही है।













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