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डीसी ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की; मातृ-शिशु स्वास्थ्य व टीबी नियंत्रण में सुधार के दिए निर्देश

पलामू (मेदिनीनगर): जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने सोमवार को समाहरणालय सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रखंडवार प्रगति की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, कुपोषण उन्मूलन, आयुष्मान भारत और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।

गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण व शत-प्रतिशत प्रसव सुनिश्चित करने का लक्ष्य

​मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की समीक्षा करते हुए उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिले में गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण और नियमित प्रसव पूर्व जांच (ANC) अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव) सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

​बैठक में आंकड़ों को साझा करते हुए बताया गया कि:

  • संस्थागत प्रसव: मई 2026 तक जिले ने 95 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है।
  • पूर्ण टीकाकरण: जिले में अब तक 94 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है।

​उपायुक्त ने इन आंकड़ों पर संतोष व्यक्त करने के साथ ही इसे और बेहतर बनाने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग और मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की हिदायत दी।

कुपोषण के खिलाफ समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग में समन्वय जरूरी

​जिले में गंभीर कुपोषित बच्चों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए डीसी ने निर्देश दिया कि कुपोषण के शिकार बच्चों की समय पर पहचान की जाए और उन्हें तुरंत ‘माल न्यूट्रिशन ट्रीटमेंट सेंटर’ (MTC) में भर्ती कराया जाए। उन्होंने कहा कि कुपोषण उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल होना बेहद जरूरी है, ताकि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार को सुचारू रूप से चलाया जा सके।

टीबी उन्मूलन: ‘निक्षय मित्र’ बनने के लिए सामाजिक सहभागिता पर जोर

​टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उपायुक्त ने जिले के संभ्रांत नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और कॉरपोरेट घरानों से आगे आने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिक से अधिक लोगों को “निक्षय मित्र” बनने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि मरीजों को बेहतर पोषण सहयोग मिल सके।

टीबी मरीजों की वर्तमान स्थिति:

जिले में वर्तमान में 1,825 टीबी मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से 162 मरीजों को पोषण किट उपलब्ध करा दी गई है। शेष बचे मरीजों को भी जल्द से जल्द सहायता राशि और पोषण किट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

 

विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की तैयारियां तेज

​बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत बच्चों की नियमित जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 11 जुलाई से 10 अगस्त तक आयोजित होने वाले ‘विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा’ की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने इस अभियान के दौरान लक्ष्य-आधारित उपलब्धि हासिल करने का कड़ा निर्देश दिया।

डिजिटल हेल्थ: आयुष्मान कार्ड और एबीएचए आईडी निर्माण में तेजी लाने के निर्देश

​आयुष्मान भारत योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की समीक्षा करते हुए डीसी ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी पात्र लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड और एबीएचए (ABHA) आईडी प्राथमिकता के आधार पर बनाई जाए।

​बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार:

  • ​जिले में अब तक 48.23 प्रतिशत एबीएचए आईडी का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
  • ​अकेले जून माह में 42,446 नई एबीएचए आईडी बनाई गई हैं।

बैठक में उपस्थित अधिकारी:

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से सिविल सर्जन, एमएमसीएच (MMCH) अधीक्षक, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM), विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के नोडल पदाधिकारी, प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) तथा स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

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