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कांग्रेस की जल्दबाजी से उलझा तमिलनाडु

कांग्रेस पार्टी ने तमिलनाडु में जल्दबाजी करके मामला उलझा दिया। इससे न सिर्फ विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का मामला टला, बल्कि विपक्षी गठबंधन के अंदर की राजनीति भी उलझ गई। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के ऐसे नेता खास कर सासंद मणिक्कम टैगोर, जो तमिलनाडु में डीएमके से अलायंस तोड़ कर विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनाव लड़ने के समर्थक थे, उन्होंने नतीजे आते ही राहुल गांधी पर दबाव डाला कि विजय का समर्थन किया। एक जानकार नेता का कहना है कि मणिक्कम टैगोर और कुछ अन्य नेताओं ने नतीजे आते ही कहना शुरू किया कि वे तो पहले से यह बात कह रहे थे और अब बिना देरी किए कांग्रेस को विजय का समर्थन करना चाहिए।

अगर कांग्रेस तत्काल समर्थन की घोषणा नहीं करती तो कोई आफत नहीं आ रही थी। डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन से बात करके भी समर्थन दिया जा सकता था, जैसे कि कम्युनिस्ट पार्टियों ने किया है। स्टालिन दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों या वीसीके और मुस्लिम लीग से नाराज नहीं हैं। लेकिन उनकी पार्टी कांग्रेस से बहुत नाराज है। हालांकि इसे लेकर भी कांग्रेस नेताओं के कहना है कि पार्टी को निकट भविष्य में डीएमके के साथ जाना ही नहीं है तो उसकी नाराजगी की क्यों परवाह करें। लेकिन इसका असर देश के दूसरे हिस्सों में गठबंधन सहयोगियों पर भी पड़ा है। वे कांग्रेस को अविश्वास की नजर से देख रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस की जल्दबाजी की वजह से विजय का मामला अटक गया। अगर कांग्रेस का समर्थन लेकर वे नहीं जाते तो हो सकता था कि राज्यपाल उनको सरकार बनाने के लिए पहली बार में ही बुला लेते। कांग्रेस की जल्दबाजी से तमिलनाडु का पूरा मामला उलझ गया।

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