मेदिनीनगर ( पलामू ): जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और पुलिस गश्त की जवाबदेही तय करने के लिए जिला पुलिस ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। पलामू पुलिस अब तकनीक का सहारा लेकर अपराध नियंत्रण की दिशा में ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत मेदिनीनगर शहर सहित जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 600 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर क्यूआर (QR) कोड स्थापित किए गए हैं।
कैसे काम करेगी यह नई प्रणाली?
नई व्यवस्था के तहत जिले के प्रमुख चौराहों, रिहायशी इलाकों, बाजारों और संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों पर विशिष्ट क्यूआर कोड लगाए गए हैं। अब गश्ती दल (Patrol Teams) के लिए केवल क्षेत्र से गुजरना काफी नहीं होगा। उन्हें निर्धारित स्थल पर रुककर अपने मोबाइल से उस क्यूआर कोड को स्कैन करना अनिवार्य होगा।
- रियल-टाइम ट्रैकिंग: जैसे ही पुलिसकर्मी कोड स्कैन करेंगे, उनकी लोकेशन और समय का डेटा तुरंत कंट्रोल रूम के सर्वर पर दर्ज हो जाएगा।
- पारदर्शिता: इससे यह सुनिश्चित होगा कि पुलिस टीम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रिय है।
- मॉनिटरिंग: वरिष्ठ अधिकारी एक क्लिक पर यह देख सकेंगे कि किस इलाके में किस समय पुलिस मौजूद थी।
डीआईजी ने की एसपी की कार्यशैली की सराहना
पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी किशोर कौशल ने इस पहल को पुलिसिंग के आधुनिकीकरण में एक मील का पत्थर बताया है। ‘राष्ट्रीय नवीन मेल’ से खास बातचीत में उन्होंने पलामू के एसपी कपिल चौधरी के नेतृत्व और कार्यकुशलता की जमकर प्रशंसा की।
”पलामू पुलिस लगातार जवाबदेह और आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में कदम बढ़ा रही है। एसपी कपिल चौधरी के नेतृत्व में तकनीक आधारित इस व्यवस्था से न केवल अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि आम जनता में सुरक्षा का भाव भी मजबूत होगा।”
— किशोर कौशल, डीआईजी (पलामू प्रक्षेत्र)
तकनीक से अपराध पर प्रहार
एसपी कपिल चौधरी की इस सक्रिय भूमिका से पलामू पुलिस अब पूरी तरह से ‘डिजिटल मोड’ में नजर आ रही है। इस व्यवस्था से गश्ती में होने वाली लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। विशेषकर रात के समय होने वाली चोरी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए यह “डिजिटल निगरानी” अत्यंत प्रभावी साबित होगी।
प्रमुख विशेषताएँ:
- जवाबदेही: ड्यूटी में कोताही बरतने वाले कर्मियों की तुरंत पहचान संभव।
- सुरक्षा कवच: संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित।
- त्वरित डेटा: गश्त का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित, जिससे भविष्य की रणनीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
पलामू पुलिस की इस पहल की शहरवासियों ने भी सराहना की है। लोगों का मानना है कि तकनीक के इस समावेश से पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और गहरा होगा।













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