मेदिनीनगर (पलामू): पलामू जिले में आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शनिवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम में गड़बड़ी के संकेत मिलने पर जिले के 17 संबद्ध अस्पतालों की जांच के आदेश दिए हैं।
जांच के लिए त्रिस्तरीय समिति का गठन
उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है:
- अपर समाहर्ता
- संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी
- जिला कल्याण पदाधिकारी
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि यह समिति अस्पतालों में जाकर आयुष्मान योजना के तहत हुए इलाज और उनके विरुद्ध सरकार से मांगे गए क्लेम की बारीकी से पड़ताल करेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और वास्तविक लाभुकों तक ही पहुंचे।
”योजनाओं में किसी भी प्रकार की पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच में कोई अस्पताल फर्जी क्लेम या अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
— दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, उपायुक्त, पलामू
आभा कार्ड और डिजिटल हेल्थ पर जोर
बैठक के दौरान जिले में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने अधिकारियों को आभा (ABHA) कार्ड को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए यह कार्ड अनिवार्य है, जिससे भविष्य में इलाज की प्रक्रिया सुगम और पारदर्शी बनेगी।
PVTG समुदायों के लिए विशेष अभियान
कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उपायुक्त ने विशेष रूप से पीवीटीजी (PVTG) समुदायों के बीच आयुष्मान कार्ड का कवरेज 100% करने का लक्ष्य रखा। उन्होंने निर्देश दिया कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले इन समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं।
इन योजनाओं की भी हुई समीक्षा
बैठक में केवल आयुष्मान योजना ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की भी प्रगति रिपोर्ट जांची गई:
- मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ स्कीम
- मुख्यमंत्री रख-रखाव योजना (अस्पतालों का बुनियादी ढांचा)
- क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का अनुपालन
- मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना
इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से सिविल सर्जन, एमएमसीएच (MMCH) सुपरिटेंडेंट समेत स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में हड़कंप मचा हुआ है।













Leave a Reply