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भ्रष्टाचार की आग में जली पचपदरा रिफाइनरी

यह बड़ी हैरानी की बात है कि राजस्थान के बाडमेर के पचपदरा में लगी रिफाइनरी की आग को प्राथमिक जांच में साजिश नहीं बताया गया है। आग लगने के बाद कहा गया था कि यह साजिश हो सकती है। चूंकि राजस्थान सीमावर्ती राज्य है तो विदेशी साजिश के आरोप लगाने में भी आसानी थी। तभी जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को जांच सौंपी गई तो अंदाजा लगाया जा रहा था कि इसमें साजिश का कोई पहलू होगा। परंतु मीडिया में एनआईए के अधिकारियों को हवाले से जो खबरें आई हैं उनमें बताया जा रहा है कि एनआईए को शुरुआती जांच में किसी तरह की साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। उलटे इस जांच में पता चला है कि पचपदरा राइफाइनरी भ्रष्टाचार की आग में जली है। खराब मैटेरियल के इस्तेमाल से आग लगी। सुरक्षा के लिए जो उपकरण लगाए गए थे वे भी खराब क्वालिटी के थे और काम करने वाले लोग भी उच्च गुणवत्ता वाले नहीं थे।

सोचें, देश में और राज्य में भी ऐसी सरकार चल रही है, जिसकी टैग लाइन ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह लाइन बोली थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस की बात कही जाती है। लेकिन लगभग 80 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनी रिफाइनरी उद्घाटन के एक दिन पहले ही जल गई। इसका बड़ा हिस्सा जल गया है और इसे शुरू होने में बहुत समय लगेगा। बहरहाल, मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि रिफाइनरी में कई पाइल पी फाइव अलॉय स्टील वाले होते हैं ताकि उच्च ताप बरदाश्त कर सकें। लेकिन उसकी जगह तीन से चार गुना सस्ती कार्बन स्टील का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह बताया जा रहा है कि तेल रिफाइन यूनिट में घटिया ऑटोमेटिक सेफ्टी वॉल्व लगाया गया। यह भी बताया गया है कि वॉल्व में कई जगह पैचवर्क किए गए और हाइड्रो टेस्टिंग में एसओपी का पालन नहीं किया गया। मैन पावर भी अच्छी गुणवत्ता का नहीं होने की खबर आई है। पहले कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के उद्घाटन की हड़बड़ी में काम बिगड़ा लेकिन अब लग रहा है कि काम तो शुरू से ही बिगड़ा हुआ था।

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