पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता और शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु का वायरल वायरल हो रहा वीडियो डीपफेक है। इसमें दावा किया गया है कि वह रिश्वत ले रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बीच इस डीपफेक वीडियो को शेयर करते हुए दुष्प्रचार किया जा रहा है।
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए दोनों चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे। इसी बीच चुनाव के दूसरे चरण (29 अप्रैल) से पहले सोशल मीडिया पर तृणमूल कांग्रेस के नेता और शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु का एक वीडियो वायरल किया गया। इसमें कथित तौर पर उन्हें रिश्वत लेते हुए दिखाया गया था। इस वीडियो को सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी जांच की। यह फर्जी साबित हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाए गए इस वीडियो का इस्तेमाल प्रदेश के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु की छवि खराब करने के उद्देश्य से किया गया।
क्या हो रहा है वायरल?
एक्स यूजर ‘Bhairav’ ने 27 अप्रैल 2026 को एक वीडियो को शेयर करते हुए अंग्रेजी में लिखा, “दूसरे चरण के चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्हें फाइलों पर हस्ताक्षर करने के बदले नकदी के बंडल लेते हुए देखा जा रहा है। चुनाव के बीच में भी टीएमसी का एकमात्र उद्देश्य लोगों को लूटना है।”
#BreakingNews 🚨 #Kolkata
Just Before the 2nd Phase Election A Video of West Bengal Education Minister Brapta Basu surfaces where he is being seen taking bundles of cash in exchange of signing files.Even in the Middle of the Election TMC 's only focus is to loot people. pic.twitter.com/ZTHgi0wUBU
— Bhairav 🔱🕉️ 🇮🇳 (@BhairavVaam) April 27, 2026
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो को समान संदर्भ में शेयर किया है। वायरल पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने पड़ताल की शुरुआत गूगल ओपन सर्च टूल के जरिए की। सबसे पहले वायरल पोस्ट के आधार पर कुछ कीवर्ड बनाए गए। फिर इन्हें गूगल ओपन सर्च टूल की मदद से खोजा गया। हमें एक भी ऐसी खबर नहीं मिली, जो वायरल दावे की पुष्टि कर सके। यदि कोई शिक्षा मंत्री रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद होता तो जरूर मीडिया की सुर्खियां बनतीं, लेकिन हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली।
इसके अलावा वायरल वीडियो बुलेटिन में चैनल का नाम और लोगो हिंदी में है, जबकि बाकी कंटेंट बांग्ला भाषा में लिखा हुआ है। इससे भी इसकी सत्यता पर प्रश्न खड़ा होता है।
विश्वास न्यूज ने यूट्यूब और सभी सोशल मीडिया चैनलों पर वायरल वीडियो में दिख रहे ‘तहलका टीवी’ नाम के चैनल को सर्च किया। हमें इस नाम का कोई चैनल नहीं मिला। सर्च के दौरान हमें ‘तहलका लाइव टीवी’ नाम का एक चैनल मिला, लेकिन इसका लोगो वायरल वीडियो वाले चैनल से एकदम अलग है। इसे नीचे देखा जा सकता है।

इसके बाद विश्वास न्यूज ने वायरल वीडियो को ध्यान से देखा। इसमें दिख रहे व्यक्ति के दोनों हाथों की आकृति सामान्य नहीं दिखी। इसी तरह जब यह व्यक्ति मोबाइल पर बात करता है, तो उसके दांत असामान्य तौर से गायब हो जाते हैं। यह सब वीडियो के एआई-निर्मित होने की ओर इशारा करते हैं।

अतिरिक्त पुष्टि के लिए हमने अपने सहयोगी ‘टीआईए’ (पूर्व में एमसीए) की पहल ‘डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट’ (डीएयू) से संपर्क किया। उन्होंने हमारे साथ कई अन्य डिटेक्शन टूल्स के एनालिसिस शेयर किए। डीएयू ने एआई डिटेक्शन टूल ‘रीसेम्बल एआई’ के डीपफेक डिटेक्टर का उपयोग करके वीडियो का परीक्षण किया, जिसने पुष्टि की कि वायरल वीडियो में एआई-जनरेटेड सामग्री है। इसके नतीजों में वीडियो को डीपफेक बताया गया।

विश्वास न्यूज ने वायरल वीडियो को एक अन्य टूल की मदद से चेक किया। बफलो यूनिवर्सिटी के ‘डीपफेक-ओ-मीटर’ के कई इंडिकेटर्स ने इस वीडियो में एआई छेड़छाड़ की अधिकतम संभावना की पुष्टि की। ‘AVSRDD’ (2025) डिटेक्टर ने इस मल्टीमीडिया के करीब 100 फीसदी, ‘LIPINC’ (2024) ने करीब 100 फीसदी और ‘XCLIP’ (2022) ने 93.50 फीसदी एआई-क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि की। इसी तरह ‘WAV2LIP-STA’ (2022) ने इसे 90 फीसदी से ज्यादा एआई-क्रिएटेड बताया।

क्या है संदर्भ?
पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं। नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे। गौरतलब है कि जाधवपुर विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारी छात्रों ने 1 मार्च 2025 को पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु की गाड़ी का घेराव किया था। इसके बाद एक शोधकर्ता को अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया था। फिर कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर विश्वविद्यालय के छात्र इंद्रानुज रॉय की शिकायत के आधार पर शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु और अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि 1 मार्च 2025 को परिसर में हुए दंगों के दौरान मंत्री की कार से रॉय को टक्कर लगी थी। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रत्या बसु ने दमदम विधानसभा सीट से 8 अप्रैल 2026 को नामांकन भरा था। दिए गएहलफनामे के अनुसार, बसु पर कोई क्रिमिनल केस दर्ज नहीं है।
जांच के अंतिम चरण में फेक वीडियो शेयर करने वाले यूजर की जांच की गई। भैरव नाम के इस एक्स हैंडल को तीन हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट जून 2019 में बनाया गया था।
निष्कर्ष: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता और शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु का वायरल वायरल हो रहा वीडियो डीपफेक है। इसमें दावा किया गया है कि वह रिश्वत ले रहे हैं। विधानसभा चुनाव के बीच इस डीपफेक वीडियो को शेयर करते हुए दुष्प्रचार किया जा रहा है।

- Claim Review : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेता और शिक्षा मंत्री ब्रत्या बसु ‘रिश्वत’ लेते पकड़ाए।
- Claimed By : X User Bhairav
- Fact Check : झूठ
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