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केजरीवाल को फिर गांधी याद आए

अरविंद केजरीवाल को फिर से महात्मा गांधी की याद आई है। उन्होंने अपना आंदोलन गांधी के नाम से शुरू किया था और उसके ईर्द गिर्द ही पूरे आंदोलन का ताना बाना बुना था। बड़ी होशियारी से अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर इंडिया अगेंस्ट करप्शन और राष्ट्रवाद का आवरण ओढ़ लिया था। लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी और सिद्धांतों को तिलांजलि दी। दूसरे नेता भी गांधी के सिद्धांत छोड़ देते हैं क्योंकि सबको पता है कि गांधी के सिद्धांतों की बात करना बहुत आसान है और सबको अच्छा भी लगता है लेकिन उनका पालन बहुत कठिन काम है। इसलिए आदर्श तो सब छोड़ देते हैं लेकिन केजरीवाल ने तो गांधी को भी छोड़ दिया।

मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने कार्यालय से गांधी की तस्वीरें हटवा दीं। सोचें, देश के हर सरकारी कार्यालय में गांधी की तस्वीर होती थी। लेकिन केजरीवाल ने कहा कि वे अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीर लगाएंगे। उन्होंने गांधी को भी किनारे कर दिया। अब पार्टी और राजनीति दोनों पर संकट आया है तो फिर गांधी याद आए हैं। पता नहीं कितने दिनों के बाद वे राजघाट गए। हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोला है। केजरीवाल चाहते हैं कि हितों के टहराव है इसलिए जस्टिस शर्मा शराब नीति केस से हट जाएं। उन्होंने हटने से मना कर दिया है। तो केजरीवाल ने सत्याग्रह का ऐलान किया है। कहा है कि वे कोर्ट में पेश नहीं होंगे और न उनका कोई वकील जाएगा। यानी अदालत एक्स पार्टी ऑर्डर करना है तो कर दे। इसलिए वे गांधी की समाधि पर गए। उन्होंने गांधी के प्रतीक का फिर से इस्तेमाल शुरू किया है देश की मौजूदा व्यवस्था को अंग्रेजों के जमाने जैसा दिखाने के लिए। यह उनका नया राजनीतिक दांव है।

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