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महिला आरक्षण पर क्या मैसेज बनवाएगी भाजपा?

भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के मसले पर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाए रखने वाली है। संसद के विशेष सत्र में 17 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल संसद में विफल हुआ था। उसके बाद लगभग दो हफ्ते से भाजपा लगातार कोई न कोई कार्यक्रम चला रही है। साथ ही चुनाव भी बहुत ताकत से लड़ रही है। गुजरात में स्थानीय निकाय का चुनाव भाजपा ने बड़े अंतर से जीता है। पांच राज्यों के चुनाव में भी भाजपा नेताओं ने पूरी ताकत लगाई। इसके साथ साथ महिला आरक्षण के मसले पर हर राज्य में कोई न कोई कार्यक्रम, प्रदर्शन या सम्मेलन हो रहा है। बड़े नेता उसमें शामिल हो रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस न तो राज्यों मे कहीं चुनाव लड़ती दिखी है और न सड़क पर उतर कर महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपना नैरेटिव लोगों तक पहुंचा पा रही है। पता नहीं कांग्रेस के नेता क्या करते रहते हैं?

बहरहाल, भाजपा महिला आरक्षण पर बड़ा मैसेज बनवाने के लिए कोई पहल कर सकती है। अभी तो महिला आक्रोश प्रदर्शन या सम्मेलन चल रहे हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि इसका अगला कदम यह होगा कि पार्टी अपनी राष्ट्रीय टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ाए। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जब अपनी नई टीम बनाएंगे तो उसमें 33 फीसदी महिलाओं को जगह मिल सकती है। ध्यान रहे भाजपा को सबसे ज्यादा जवाब इसी बात का देना पड़ रहा है कि वह अभी महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू कर दे रही है। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने संसद में चर्चा को दौरान भी कहा कि सरकार बिल ले आए कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाती हैं तो विपक्ष तुरंत उसे समर्थन कर देगा। यह सवाल भी उठ रहा है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए आरक्षण का इंतजार क्यों करना है। तभी भाजपा अपने संगठन से शुरुआत कर सकती है।

बताया जा रहा है कि नितिन नबीन की टीम में शामिल करने के लिए महिला नेताओं की तलाश चल रही है। भाजपा के एक जानकार नेता का कहना है कि 2014 में भाजपा को जो बड़ी जीत मिली थी उससे पहले कांग्रेस की सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में पार्टी की महिला प्रवक्ताओं का बड़ा हाथ था। स्मृति ईरानी, निर्मला सीतारमण, मीनाक्षी लेखी आदि महिलाएं प्रवक्ता थीं। अब ऐसा कोई भी प्रवक्ता नहीं है। इसी तरह महासचिवों में भी सिर्फ एक महिला है। जानकार सूत्रों का कहना है कम से कम दो या तीन महासचिव और कम से कम तीन या चार महिला प्रवक्ता नियुक्त किया जा सकता है।

दूसरी पार्टियों से आए प्रवक्ताओं को भी भाजपा धीरे धीरे किनारे कर रही है। उनकी कोई भूमिका नहीं रह गई है। महासचिव और प्रवक्ताओं के अलावा सचिवों में भी अच्छी खासी संख्या में महिलाएं नियुक्त होंगी। प्रकोष्ठ और प्रभारी भी महिलाएं बनाई जाएंगी। भाजपा यह शुरुआत करती है तो अच्छी बात होगी। उसके बाद अगले साल के शुरू में पांच राज्यों में और साल के अंत में सात राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। उन राज्यों में भाजपा टिकट बंटवारे में महिलाओं को बिना कहे 33 फीसदी तक आरक्षण दे सकती है। अगर 33 फीसदी न भी हो तो एक चौथाई सीटें महिलाओं को देकर भाजपा अपनी प्रतिबद्धता दिखाने का प्रयास करेगी। हो सकता है कि बंगाल के नतीजों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल हो तो उसमें भी महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है।

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