मेदिनीनगर (पलामू): प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवता का एक ऐसा चेहरा बुधवार को पलामू समाहरणालय में देखने को मिला, जिसने न केवल वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि व्यवस्था के प्रति आम जनमानस के विश्वास को भी प्रगाढ़ किया। मौका था समाहरणालय सभागार में आयोजित ‘जन समाधान दिवस’ का, जहां उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने प्रोटोकॉल की दीवारों को तोड़कर एक दिव्यांग महिला की मदद के लिए खुद नीचे सीढ़ियों तक दौड़ लगा दी।
सीढ़ियां नहीं चढ़ सकी महिला, तो नीचे पहुंच गए DC
कार्यक्रम के दौरान जब उपायुक्त जनसमस्याएं सुन रहे थे, तभी उन्हें सूचना मिली कि मेदिनीनगर की ही रहने वाली एक दिव्यांग महिला, शीला कुमारी, अपनी फरियाद लेकर आई हैं। शीला दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण व्हीलचेयर के सहारे समाहरणालय पहुंची थीं, लेकिन सभागार तक जाने वाली सीढ़ियां उनके लिए एक अभेद्य दीवार बन गई थीं। वह नीचे ही असहाय खड़ी थीं।
जैसे ही यह जानकारी उपायुक्त श्री शेखावत तक पहुंची, उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने चल रहे आधिकारिक कार्यक्रम को बीच में ही रोका और त्वरित गति से नीचे सीढ़ियों की ओर चल पड़े।
सीढ़ियों पर ही लगा ‘जन दरबार’
दृश्य तब और भावुक हो गया जब उपायुक्त ने बिना किसी हिचकिचाहट के सीढ़ियों पर ही बैठकर शीला कुमारी से बात करना शुरू कर दिया। उन्होंने न केवल महिला के आवेदन को विस्तार से पढ़ा, बल्कि अत्यंत आत्मीयता के साथ उनकी परेशानियों को समझा।
”प्रशासन का काम जनता की सेवा करना है। अगर कोई शारीरिक अक्षमता के कारण हम तक नहीं पहुंच सकता, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन तक पहुंचें।” — दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, उपायुक्त, पलामू
तुरंत दिए निर्देश: “दोबारा आने की जरूरत नहीं पड़ेगी”
महिला की समस्या सुनने के बाद उपायुक्त ने मौके पर ही संबंधित विभाग के पदाधिकारियों को तलब किया। उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिया कि शीला कुमारी के मामले का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने दिव्यांग महिला को आश्वस्त करते हुए कहा:
- त्वरित कार्रवाई: आपकी समस्या का समाधान यथाशीघ्र सुनिश्चित किया जाएगा।
- सहूलियत: आपको अब दोबारा कार्यालय के चक्कर काटने या सीढ़ियां चढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- निगरानी: संबंधित अधिकारी सीधे इस मामले की रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को सौंपेंगे।
जनता ने की सराहना
उपायुक्त के इस मानवीय व्यवहार की पूरे समाहरणालय परिसर में चर्चा रही। वहां मौजूद अन्य फरियादियों और कर्मियों ने कहा कि अक्सर लोग अधिकारियों से मिलने के लिए घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन एक जिले के शीर्ष अधिकारी का खुद चलकर नीचे आना प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई परिभाषा लिख गया है। शीला कुमारी की आंखों में भी इस व्यवहार को देखकर राहत और उम्मीद के आंसू साफ देखे जा सकते थे।













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