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आखिरी चरण से पहले अफवाहों का बाजार

पश्चिम बंगाल में दूसरे और आखिरी चरण के मतदान से पहले कोलकाता से लेकर दिल्ली तक अफवाहों का जो बाजार गर्म हुआ वह कमाल का था। ऐसा लग रहा है कि आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों को तोड़ कर आनन फानन में भाजपा में शामिल कराने के पीछे भी यह मंशा रही होगी कि ममता बनर्जी के सांसदों को लेकर अफवाहें फैलाई जाएंगी। पता नहीं शुरुआत कहां से हुई लेकिन ममता बनर्जी के सांसदों के टूटने की अफवाह ऐसी फैली कि पूछिए मत। भाजपा के छुटभैया नेताओं ने पहले सोशल मीडिया में लिखना शुरू किया लेकिन हद तो तब हो गई, जब कोलकाता के पत्रकार और दिल्ली के भी कुछ पत्रकारों ने राइट विंग सोशल मीडिया हैंडल्स के पोस्ट को रीपोस्ट करना शुरू किया। इन सभी पोस्ट में कहा जा रहा था कि ममता बनर्जी की पार्टी टूट रही है।

यह कहने का तरीका इतना विश्वसनीय था कि किसी को यकीन आ जाए। सबसे पहले जो पोस्ट्स आईं उनमें कहा गया कि ममता बनर्जी की पार्टी के 15 लोकसभा सांसदों ने भाजपा के एक बड़े नेता से संपर्क किया है और भाजपा में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद दूसरी पोस्ट आई कि तृणमूल कांग्रेस के आठ या नौ राज्यसभा सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं और पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म होते ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे। इन अफवाहों की टाइमिंग भी कमाल की है। जिस दिन राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया और तीन राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हुए उसी दिन से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को लेकर अफवाहे शुरू हुईं।

ऐसा लग रहा है कि बंगाल की अफवाह चलाने के लिए ही जल्दबाजी में आप के तीन राज्यसभा सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस कराई गई। ध्यान रहे सभी सात सांसद एक साथ शामिल नहीं हुए। सिर्फ तीन सांसदों राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने नितिन नबीन के सामने भाजपा ज्वाइन की। उसके बाद बंगाल को लेकर अफवाहों का सिलसिला शुरू हो गया।

जब तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की खबर आई तो राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार के रूप में चैनलों में बैठ कर भाजपा का गुणगान करने वालों को क्रिप्टिक पोस्ट्स लिखनी शुरू की। किसी ने राज्यसभा में भाजपा के सांसदों की संख्या बढ़ने का जिक्र करते हुए लिखा कि लोकसभा में भी भाजपा के सांसदों की संख्या बढ़ने जा रही है। एक ने लिखा कि दो प्रादेशिक पार्टियों के अंदर बहुत बेचैनी है और बहुत जल्दी वहां टूट होगी। इसे आगे बढाते हुए एक व्यक्ति ने लिखा कि ममता बनर्जी के भतीजे की वजह से तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद आहत हैं और वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं।

कहा जाने लगा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद नतीजों तक भी इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। वे चुनाव खत्म होते ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे। सोचें, अभी पिछले दिनों 17 अप्रैल को महिला आरक्षण के मसले पर लोकसभा में वोटिंग हुई, जिसमें ममता बनर्जी के 21 सांसदों ने हिस्सा लिया और सबने सरकार के बिल के खिलाफ वोटिंग की। बाकी सात सांसद पश्चिम बंगाल में रात दिन प्रचार में लगे हुए थे। इसलिए पहले ही कह दिया गया था कि वे नहीं आ पाएंगे। फिर भी मतदान के आखिरी चऱण से पहले मतदाताओं को यह बताने के लिए ममता कमजोर हो रही हैं, इस किस्म की अफवाहें फैलाई गईं।

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