मेदिनीनगर : पलामू के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने जिले में पेयजल संकट के समाधान और सरकार की महत्वाकांक्षी जल योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है। सोमवार को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
FHTC लक्ष्य का 53% कार्य पूर्ण, शेष के लिए समय सीमा तय
बैठक में ‘फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन’ (FHTC) की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि जिले में कुल 3,65,812 घरों को नल से जल जोड़ने का लक्ष्य है। अब तक 1,93,575 कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जो लक्ष्य का लगभग 52.91% है। उपायुक्त ने शेष 1,72,237 कनेक्शनों को अविलंब पूरा करने पर बल दिया और कार्य में आ रही तकनीकी अड़चनों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए ‘गैंगमैन’ तैनात
जिले में पेयजल की वर्तमान स्थिति पर चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुल 27,037 चापाकलों में से 3,387 चापाकल वर्तमान में खराब हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि:
- सभी खराब चापाकलों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए।
- प्रखंड स्तर पर नियुक्त किए गए गैंगमैन का व्यापक प्रचार-प्रसार पंचायत स्तर तक किया जाए, ताकि ग्रामीण अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
- सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के तहत जो कार्य आंशिक रूप से अधूरे हैं, उन्हें तत्काल शत-प्रतिशत पूर्ण किया जाए।
NHAI से समन्वय और लंबित योजनाओं पर सख्ती
मल्टी विलेज स्कीम (MVS) की समीक्षा में पाया गया कि कुछ बड़ी योजनाओं में भूमि अधिग्रहण और NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) से एनओसी (NOC) न मिलने के कारण देरी हो रही है। कार्यपालक अभियंता ने सूचित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के कारण कुछ पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे जलापूर्ति बाधित है। इस पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि:
- ऐसी बाधित योजनाओं की सूची बनाकर प्रोजेक्ट डायरेक्टर (NHAI) के साथ समन्वय स्थापित करें।
- क्षतिग्रस्त योजनाओं को अविलंब दुरुस्त कराया जाए।
- धीमी प्रगति वाली कार्यदायी एजेंसियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
गुणवत्ता और मॉनिटरिंग पर जोर
उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने सभी सहायक एवं कनीय अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे कागजों के बजाय फील्ड विजिट पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और प्रगति रिपोर्ट को नियमित रूप से अपडेट किया जाना अनिवार्य है।
बैठक में उपस्थिति:
समीक्षा बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता, विभिन्न प्रखंडों के सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता मुख्य रूप से उपस्थित रहे।













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