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ईरान पर आर्थिक दबाव तेज, हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की हालिया संघर्ष का अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए अपने अंदाज में ईरान की बदहाली बयां की।

उन्होंने कहा कि ईरान “कैश के लिए तरस रहा है” और हर दिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान झेल रहा है, जिससे वह तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाना चाहता है। वहां के नौसैनिक और पुलिस को वेतन नहीं मिल रहा है और वो सब दुखी हैं।

ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।

होर्मुज, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है।

दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था इस जलमार्ग और तेल निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है। एक अनुमान के मुताबिक, नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना लगभग 43.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो तेल निर्यात और व्यापार रुकने से जुड़ा है।

हालात को और गंभीर बनाते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में लंबे समय तक नाकेबंदी रहने पर आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो सकती हैं, जिससे मुद्रा पर दबाव, महंगाई और बैंकिंग संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

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इस बीच, क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां पहले रोजाना 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद सीमित रह गई है। कई टैंकर और जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, तेहरान ने इस रणनीति को “आर्थिक युद्ध” बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह इसका जवाब दे सकता है।

स्थिति सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।

एटलांटिक काउंसिल ऑफ युनाइटेड स्टेट्स के अनुसार, अगर हॉर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है, तो न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में कमी और व्यापार मार्गों में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

Pic Credit : ANI

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