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केजरीवाल और स्टालिन एक साथ

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की जो भी रिपोर्ट आ रही है उसमें कहा जा रहा है कि तमिलनाडु और उससे सटे केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा विरोधी गठबंधन में कमजोर कड़ी कांग्रेस है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से ठीक पहले सर्वे करने वाली एजेंसियों ने जो डाटा इकट्ठा किया है उसके मुताबिक तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन जीत जाएगा लेकिन मुकाबला काफी नजदीकी होगा। अगर ऐसा होता है तो उसके पीछे कांग्रेस को भी एक जिम्मेदार कारण माना जा रहा है। असल में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के पहले से सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस यानी एसपीए के अंदर अपनी सीटें बढ़ाने की मांग शुरू कर दी थी। ज्यादा सीटों के लिए पार्टी के नेता ही एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार की कमियां भी बताते थे और उसे कठघऱे में खड़ा करते थे। इससे दोनों पार्टियों के बीच तालमेल बिगड़ा था। कांग्रेस ने दबाव डाल कर पिछली बार के मुकाबले तीन सीट ज्यादा ले ली। वह इस बार 28 सीटों पर लड़ रही है।

इसके बावजूद राहुल गांधी पहले चुनाव प्रचार से नदारद रहे और जब प्रचार में उतरे तो डीएमके नेताओं से दूरी रखी। उन्होंने एमके स्टालिन के साथ मंच साझा नहीं किया। इसके उलट आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल तमिलनाडु प्रचार में पहुंचे तो स्टालिन के साथ न सिर्फ मंच साझा किया, बल्कि दोनों ने एक साथ रोड शो भी किया। सोचें, केजरीवाल अब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन वे प्रचार के लिए तमिलनाडु गए और स्टालिन के साथ मंच साझा किया। स्टालिन ने भी केजरीवाल के भाजपा विरोधी स्टैंड को मान्यता दी। उनको पता है कि इस समय केजरीवाल का चेहरा भाजपा विरोधी वोट को एकजुट करने में ज्यादा कामयाब है। तभी स्टालिन ने भी राहुल की परवाह नहीं की और केजरीवाल के साथ रोड शो किया।

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