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नीतीश किसको नेता चुनेंगे? – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रिटायर नहीं हो रहे हैं। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री पद से हटा कर राज्यसभा भेजने का कदम उनको संन्यास पर रवाना करने वाला साबित होगा। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उनके आसपास की जो टीम उनके मुख्यमंत्री रहते सत्ता का सुख ले रही थी वह अब भी उनको सक्रिय बनाए हुए है। तभी नीतीश कुमार ने अपने करीबियों और परिवार के सदस्यों के साथ एक मीटिंग में कहा है कि जब तक वे हैं तब तक चिंता करने की जरुरत  नहीं है। पिछले दिनों जनता दल यू के विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को इस बात के लिए अधिकृत किया गया कि वे पार्टी विधायक दल के नेता का चुनाव करें। यह बैठक विधायक दल का नेता चुनने के लिए हुई थी लेकिन बिल्कुल कांग्रेस की तर्ज पर आलाकमान को अधिकृत किया गया। अब सबके चेहन में यह सवाल है कि नीतीश किसको नेता चुनेंगे?

यह लगभग तय है कि नीतीश अपने बेटे निशांत कुमार को अभी नेता नहीं बना रहे हैं। जनता दल यू के कई नेता चाह रहे थे कि निशांत के विधायक बने बगैर ही उनको विधान मंडल दल का नेता बना दिया जाए। उनका कहना था कि अगले महीवे विधान परिषद की नौ सीटें खाली हो रही हैं और उसके अलावा नीतीश कुमार की अपनी विधान परिषद सीट भी खाली हुई है। उसमें से किसी पर निशांत को भेज दिया जाए। पार्टी के कई नेता इस राय के हैं कि निशांत को नालंदा की हरनौत सीट से चुनाव लड़ाया जाए। ध्यान रहे उसी सीट से नीतीश पहली बार विधायक बने थे। वहां से अभी हरिनारायण सिंह जीते हैं, जो काफी बुजुर्ग हो गए हैं और सीट छोड़ने को तैयार हैं। सीट छोड़ने के बदले उनको विधान परिषद भेजा जा सकता है। जानकार सूत्रों का कहना है कि नीतीश अभी इनमें से किसी काम के लिए तैयार नहीं हैं। अब सवाल है कि निशांत अगर विधान परिषद नहीं जाएंगे तो अगले कुछ दिन में या छह महीने बाद ही उप मुख्यमंत्री कैसे बनेंगे? उस समय उनके लिए किसी से सीट खाली करानी होगी।

बहरहाल, संभव है कि नीतीश से अगले कुछ दिन में फैसला बदलवाया जाए। अगले महीने के आखिर तक विधान परिषद का चुनाव होगा। लेकिन उससे पहले पार्टी को विधायक दल का नेता चुनना है। कहा जा रहा है कि सात बार के विधायक और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को नेता चुना जा सकता है। वे नीतीश के सबसे भरोसेमंद सहयोगी हैं। जब राजद के साथ नीतीश ने सरकार बनाई थी तो लड़ भिड़ कर स्पीकर का पद लिया था और विजय चौधरी को स्पीकर बनाया था। अभी पार्टी में उनकी हैसियत नीतीश के बाद नंबर दो की है। शपथ ग्रहण में भी उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बाद दूसरे नंबर पर शपथ ली। इससे भी उनकी हैसियत का पता चलता है। लेकिन मुश्किल यह है कि जनता दल यू में इस बात को लेकर बड़ी नाराजगी है कि अगड़ी जाति के नेताओं को ही आगे बढ़ाया जा रहा है। परिवार के अंदर से यह आवाज उठी और नीतीश के सामने कहा गया कि केंद्र में पार्टी को एक कैबिनेट मंत्री का पद मिला तो भूमिहार नेता ललन सिंह को वह पद मिला और बिहार में दूसरे भूमिहार नेता विजय चौधरी को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष मैथिल ब्राह्मण जाति के संजय झा हैं। दूसरे उप मुख्यमंत्री विजेंद्र यादव हैं। ऐसे में कुर्मी जाति का क्या होगा, जिसके आधार वोट के दम पर जदयू की राजनीति होती है? विधायक दल का नेता चुनते समय इसका ध्यान रखना होगा। नीतीश के ऊपर कुर्मी नेतृत्व आगे करने का बड़ा दबाव है।

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