तय मानकों की अनदेखी: पिलर में 12 MM की जगह 8 MM की छड़ और बांग्ला ईंटों का प्रयोग
मेदिनीनगर (पलामू) : झारखंड के पलामू जिले अंतर्गत तरहसी थाना क्षेत्र के ग्राम बजलपुर उत्तरी टोला में सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक जीवंत नमूना देखने को मिल रहा है। यहाँ निर्माणाधीन ‘सरना स्थल’ अपनी पूर्णता से पहले ही जर्जर अवस्था में पहुँच गया है। विभागीय मिलीभगत और ठेकेदार की मनमानी के कारण इस धार्मिक स्थल की दीवारें अभी से दरकने लगी हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की भावनाओं को गहरा ठेस पहुँचा है।
गुणवत्ता से खिलवाड़: ‘कागजी’ मानक और ‘कच्ची’ ईंटें
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। जाँच में पाया गया कि जहाँ चहारदीवारी के पिलर की मजबूती के लिए 12 MM की छड़ों का उपयोग अनिवार्य था, वहाँ ठेकेदार द्वारा लागत कम करने के लिए महज 8 MM की पतली छड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
यही नहीं, निर्माण में प्रयुक्त सामग्री पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
अव्वल दर्जे की ईंटों के स्थान पर ‘बंगला भट्ठे’ की कच्ची और दोयम दर्जे की ईंटों का धड़ल्ले से उपयोग।
सीमेंट और बालू के मिश्रण में मानकों की अनदेखी, जिससे जुड़ाई में मजबूती का अभाव।
ग्रामीणों का दावा है कि छत का हिस्सा अभी से धंसने लगा है, जो भविष्य में बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा है।
बिना ‘चेक स्लिप’ के चल रहा है खेल
इस पूरे मामले में सबसे संदेहास्पद पहलू यह है कि स्थल पर कार्य का कोई ‘चेक स्लिप’ उपलब्ध नहीं है। बिना किसी तकनीकी निरीक्षण और उचित कागजी कार्रवाई के निर्माण कार्य का जारी रहना सीधे तौर पर विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह न केवल सरकारी राशि का गबन है, बल्कि उनकी धार्मिक आस्था के साथ एक क्रूर मजाक है।
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधा गया, तो उनकी ओर से संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।
कनीय अभियंता (JE) दिनेश कुमार गुप्ता ने बार-बार फोन किए जाने के बावजूद संपर्क करना उचित नहीं समझा। वहीं, सहायक अभियंता (AE) शिव शंकर कुमार ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए पल्ला झाड़ लिया। हालांकि उन्होंने जाँच की बात कही, लेकिन बाद में उनका फोन भी रिसीव नहीं हुआ।
बजलपुर उत्तरी टोला के निवासियों ने अब जिला प्रशासन और उपायुक्त से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि:
- निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जाँच तुरंत सुनिश्चित की जाए।
- दोषी ठेकेदार और लापरवाह इंजीनियरों पर कानूनी कार्रवाई हो।
- निर्माण कार्य को मानक के अनुरूप पुनः प्रारंभ किया जाए।













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