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विपक्ष के पास कोई रास्ता नहीं है

विपक्षी पार्टियों की बुधवार, 15 अप्रैल को बैठक होने वाली है। इसमें 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के सत्र के एजेंडे को लेकर चर्चा होगी। सरकार संविधान संशोधन के विधेयक ला रही है, जिसके जरिए महिला आरक्षण और परिसीमन को जनगणना की बाध्यता से मुक्त किया जाएगा। इससे लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटें 50 फीसदी तक बढ़ाने की अनुमति मिलेगी और फिर महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित होगा। सरकार ने इसका माहौल बनाने के लिए सारे उपाय किए हैं। दिन भर टेलीविजन चैनलों और रेडियो पर महिला सशक्तिकरण के विज्ञापन चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने लेख लिखे, वीडियो संदेश दिया औऱ सांसदों को चिट्ठी लिख कर महिला आरक्षण पर समर्थन मांगा। इस तरह सरकार की ओर से ऐसा माहौल बना दिया गया है कि महिला आरक्षण लागू किया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होगा और उसमें महिलाओं की भागीदारी मजबूती से स्थापित होगी। सरकार ने बड़ी होशियारी से परिसीमन की बात को पीछे कर दिया है।

हकीकत यह है कि सरकार की मुख्य मंशा परिसीमन की है। महिला आरक्षण तो बाई प्रोडक्ट है। सोनिया गांधी ने अंग्रेजी के एक अखबार में लेख लिख कर इसका खुलासा किया कि असली मसला महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। इसके बावजूद विपक्ष के पास कोई रास्ता नहीं है। विपक्ष को पता है कि सरकार महिला आरक्षण के आवरण में परिसीमन को लागू करने जा रही है। एक तो सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और परिसीमन में सीटों की संरचना ऐसी बनाई जाएगी, जिससे भाजपा को फायदा होगा। इसके बावजूद विपक्ष को इसका समर्थन करना होगा क्योंकि सरकार की ओर से खास कर प्रधानमंत्री मोदी की ओर से महिला आरक्षण का ऐसा माहौल बनाया गया है कि अगर विपक्ष ने इसका विरोध किया तो उसको महिला विरोधी माना जाहिए। संसद की कार्यवाही में विपक्षी पार्टियां परिसीमन की मुद्दा उठाएंगी लेकिन मजबूरी में उनको इसका समर्थन करना होगा, जैसे सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून का किया था।

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