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प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे निशाने पर

महाराष्ट्र की राजनीति में बहुत उथल पुथल मची है। खास कर एनसीपी की राजनीति में है। एक तरफ एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं सुनेत्रा पवार की चुप्पी है तो दूसरी ओर शरद पवार की एनसीपी के विधायक रोहित पवार का मुखर हमला है। इस बीच खबर है कि सुनेत्रा पवार ने अपने बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने के बाद अब छोटे बेटे जय पवार को भी सक्रिय राजनीति में उतार दिया है। उनकी पार्टी के अंदर मराठा बनाम गैर मराठा का विवाद भी चल ही रही है। प्रफुल्ल पटेल से लेकर सुनील तटकरे और छगन भुजबल से लेकर हसन मुश्रिफ तक सब गैर मराठा है। कहा जा रहा है कि प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व में इस समूह ने एनसीपी को नियंत्रित करने की कोशिश की थी, जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की मदद से सुनेत्रा पवार ने विफल कर दिया। आने वाले दिनों में इसमें कुछ और बड़े खुलासे होंगे।

अभी पिछले दिनों रोहित पवार के हवाले से खबर आई कि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद चुनाव आयोग को एक चिट्ठी भेजी गई थी, जिसमें कहा गया था कि अब पार्टी संगठन की पूरी कमान कार्यकारी अध्यक्ष यानी प्रफुल्ल पटेल के हाथ में चली गई है। दावा किया जा रहा है कि सुनेत्रा पवार को इस चिट्ठी की जानकारी नहीं थी। अब जबकि वे पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन ली गई हैं तो उन्होंने अध्यक्ष चुने जाने के बाद मार्च के आखिरी हफ्ते में चुनाव आयोग को चिट्ठी भेजी और पहले की चिट्ठी की वैधता समाप्त मानने को कहा। इससे पहले रोहित पवार ने विमान हादसे में साजिश की बात कही थी तब कहा था कि एक फोन आया, जिसके बाद अजित पवार ने सड़क के रास्ते जाने का कार्यक्रम रद्द किया और विमान से गए। बाद में एक दूसरे नेता ने दावा किया कि वह फोन करने वाले व्यक्ति प्रफुल्ल पटेल थे। ध्यान रहे अजित पवार के निधन के बाद उनकी पार्टी पर देवेंद्र फड़नवीस की भी नजर है और शरद पवार की भी। दोनों एनसीपी का विलय रूक गया है लेकिन जल्दी ही शरद पवार एक और प्रयास करेंगे। टाइमिंग पर नजर ऱखने की जरुरत है।

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