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पश्चिम एशिया पर सरकार का मंत्री समूह

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद मंत्री समूह खत्म कर दिए थे। उससे पहले मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में 30 मंत्री समूह थे। इनमें से नौ अधिकार प्राप्त मंत्री समूह थे और 21 सामान्य मंत्री समूह थे। एक समय ऐसा था, जब एक दर्जन से ज्यादा मंत्री समूहों की अध्यक्षता प्रणब मुखर्जी करते थे। सत्ता में आने के बाद मोदी ने स्थायी और अस्थायी मंत्री समूहों को खत्म कर दिया। उसके बाद ऐसा लगता है कि सरकार का संकल्प रहा कि मंत्री समूह नहीं बनाना है। तीसरी सरकार में संभवतः पहली बार नरेंद्र मोदी ने मंत्री समूह का गठन किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्री समूह का गठन किया गया है, जो पश्चिम एशिया के हालात पर नजर रख रही है।

पहले एक अनौपचारिक मंत्री समूह की बात हुई थी, जिसकी अध्यक्षता अमित शाह के करने की खबर आई थी। बाद में औपचारिक रूप से एक अधिकारी प्राप्त मंत्री समूह का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष राजनाथ सिंह बने। उन्होंने मंत्री समूह की पहली बैठक भी की है। इसमें पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ वाणिज्य मंत्रालय के साथ उन्होंने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की, कच्चे तेल की खरीद से लेकर देश में आपूर्ति शृंखला को बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा हुई। इसके राजनीतिक पहलू को देखें तो ऐसा पहले से माना जा रहा था लेकिन अब पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसद कह रहे हैं कि यूपीए सरकार में जो भूमिका प्रणब मुखर्जी की थी वही भूमिका मौजूदा सरकार में राजनाथ सिंह निभा रहे हैं। पश्चिम एशिया के संकट पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता भी उन्होंने की थी औ अब मंत्री समूह का नेतृत्व भी वे कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों के साथ उनके सद्भाव और दिल्ली की राजनीति में उनके अनुभव को देखते हुए यह भूमिका दी गई है।

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