मेदिनीनगर , (पलामू) : 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर के शहादत दिवस पर आज नीलांबर-पितांबरपुर में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न केवल शहीदों को याद किया गया, बल्कि वर्तमान सरकारों की नीतियों के खिलाफ जन-आंदोलन का बिगुल भी फूँका गया।
श्रद्धांजलि और मौन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर किया गया। इसके पश्चात उपस्थित जनसमूह और विभिन्न संगठनों के नेताओं ने शहीदों की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सभा की अध्यक्षता भाकपा माले के प्रखंड कमेटी सचिव (नीलांबर-पितांबरपुर सतबरवा) सह आदिवासी संघर्ष मोर्चा के नेता कमेश सिंह चेरो ने की।
शहादत स्थली की उपेक्षा पर बरसे बी.एन. सिंह
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय किसान महासभा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष कामरेड बी.एन. सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “नीलांबर-पीतांबर जैसे किसान पुत्रों ने जिस जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया और फांसी के फंदे को चूमा, आज उन्हीं की शहादत स्थली अतिक्रमण की शिकार है। यह केंद्र और राज्य सरकार की घोर विफलता है कि वे शहीदों की विरासत को सुरक्षित नहीं रख पा रही हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकारें केवल प्रतीकात्मक सम्मान का ढोंग कर रही हैं, जबकि जमीनी हकीकत उपेक्षा और अपमान की है। उन्होंने आह्वान किया, “जो हक मांगने से नहीं मिलता, उसे छीनना पड़ता है।”
राजनीतिक और सामाजिक दिग्गजों का जमावड़ा
इस सभा में पलामू जिले के विभिन्न संगठनों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रमुख उपस्थित लोगों में शामिल थे:
- भाकपा माले: जिला सचिव कामरेड रविंद्र राम, दिव्या भगत, अविनाश रंजन, शिवनाथ महतो, कविता सिंह।
- जनसंघर्ष मोर्चा व अन्य: बृजनंदन मेहता, चंद्रधन महतो (झारखंड क्रांति दल), राजेंद्र राम, भरदुल राम।
- सामाजिक एवं अल्पसंख्यक नेता: रवि पाल (SC-ST-OBC माइनॉरिटी), ईश्वरी महतो (झामुमो), राजू रजक, इकबाल पाल, सत्येंद्र पासवान।
- किसान एवं आदिवासी महासभा: राजकुमार सिंह, शमीम अंसारी, नंदकिशोर सिंह चेरो, शत्रुघ्न आजाद।
- खरवार एकता परिषद: प्रमोद सिंह खरवार, भीम सिंह खरवार, अनुज सिंह खरवार।
विशाल मार्च और गूंजते नारे
सभा के समापन के बाद शहादत स्थल से एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। यह मार्च गांधी चौक होते हुए शहीदों के समाधि स्थल तक पहुंचा। मार्च के दौरान “शहीद नीलांबर-पीतांबर अमर रहें”, “शहादत स्थल को अतिक्रमण मुक्त करो” और “उनके अरमानों को मंजिल तक पहुंचाएंगे” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
आंदोलन की चेतावनी
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि शहादत स्थल को अतिक्रमण मुक्त कराना केवल एक स्मारक का मुद्दा नहीं, बल्कि यह आदिवासियों और मूलवासियों की अस्मिता का प्रश्न है। भारी संख्या में पहुंची महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा। कार्यक्रम का समापन ‘शहीदों को जोहार’ के साथ हुआ।













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