नीलांबर-पीतांबरपुर । प्रखंड क्षेत्र के कुंदरी स्थित परियोजना रामकेश्वर उच्च विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था की लचर तस्वीर सामने आई है, जिसने विभागीय दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय में एक तरफ जहां शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर हैं।
बीमार शिक्षक की जगह 12वीं का छात्र ले रहा क्लास
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रतिनियोजन (डेपुटेशन) पर कार्यरत शिक्षक सुदर्शन मेहता अपनी बीमारी का हवाला देकर नियमित रूप से कक्षाओं में पढ़ाने के बजाय उच्च विद्यालय धनगांव के 12वीं कक्षा के एक छात्र से बच्चों को पढ़वा रहे हैं।
आरोप के अनुसार, संबंधित शिक्षक सुबह विद्यालय पहुंचकर अपनी हाजिरी दर्ज कराते हैं और उसके बाद वहां से चले जाते हैं। फिर छुट्टी के समय वापस आकर औपचारिकता पूरी करते हैं। किराए के छात्र के भरोसे चल रही पढ़ाई से अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
तीन वर्षों से निराशाजनक आ रहा मैट्रिक का रिजल्ट
मामले पर विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजन कुमार ने बताया कि संस्थान में शिक्षकों की भारी कमी लंबे समय से बनी हुई है। विशेषकर विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों की तैयारी पूरी तरह ठप पड़ी है।
“शिक्षकों के अभाव का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। यही वजह है कि लगातार तीन वर्षों से विद्यालय का मैट्रिक परीक्षा परिणाम अत्यंत निराशाजनक रहा है।”
प्रधानाध्यापक
जर्जर छत, टूटा फर्श और अधूरा निर्माण
समस्या सिर्फ शिक्षकों की कमी तक सीमित नहीं है। विद्यालय भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। बरसात के मौसम में छत से प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है, जिससे किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है।
- सुविधाओं का अकाल: कक्षा के फर्श टूटे हुए हैं और छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है।
- अधूरा पड़ा भवन: ठेकेदार द्वारा एक नए भवन का निर्माण कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया है।
प्रधानाध्यापक के अनुसार, इन सभी समस्याओं को लेकर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस पूरे प्रकरण में जब आरोपी शिक्षक सुदर्शन मेहता और शिक्षा विभाग के संबंधित वरीय अधिकारियों से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके चलते विभाग या संबंधित शिक्षक की आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।
शिक्षकों की अनुपस्थिति, किराए के छात्र से पढ़ाई और जर्जर भवन के बीच यह विद्यालय इस बात का बड़ा उदाहरण बन गया है कि किस तरह ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।













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