रांची : झारखंड के शहरों और ग्रामीण इलाकों में डीजे के अनियंत्रित शोर से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार अब एक नई और सख्त ‘ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमावली’ लागू करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों और नागरिक समूहों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करते हुए, प्रशासन अब पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की जगह कान फाड़ देने वाले डीजे कल्चर पर नकेल कसने जा रहा है।
डीजे बजाने पर निष्कर्ष का वीडियो
साइलेंस जोन में डीजे बजाया तो खैर नहीं
नए प्रस्तावित नियमों के तहत राज्य के सभी अस्पतालों, अदालतों और शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे को ‘नो डीजे जोन’ घोषित किया जाएगा। इस परिधि में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग पूर्णतः वर्जित होगा। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक डीजे बजाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
तकनीकी शिकंजा: साउंड लिमिटर होगा अनिवार्य
सरकार अब डीजे संचालकों के लिए ‘साउंड लिमिटर’ (Sound Limiter) लगाना अनिवार्य करने जा रही है।
- ऑटो-कट सिस्टम: यदि साउंड सिस्टम की आवाज निर्धारित सीमा (जैसे 75 \text{ dB}) से ऊपर जाती है, तो यह यंत्र बिजली की आपूर्ति काट देगा और सिस्टम अपने आप बंद हो जाएगा।
- बिना लिमिटर लाइसेंस नहीं: भविष्य में केवल उन्हीं ऑपरेटरों को व्यापारिक लाइसेंस दिया जाएगा या नवीनीकरण किया जाएगा, जिनके सिस्टम में सरकार द्वारा प्रमाणित साउंड लिमिटर लगा होगा।
आयोजक भी घेरे में: ‘सिंगल विंडो’ से मिलेगी अनुमति
अब किसी भी शादी, जुलूस या सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए आयोजकों को ‘एकल खिड़की’ (Single Window Clearance) प्रणाली के माध्यम से स्थानीय पुलिस और प्रशासन से लिखित अनुमति लेनी होगी।
शपथ पत्र अनिवार्य: अनुमति मिलते समय आयोजक को एक कानूनी शपथ पत्र देना होगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि नियम टूटने पर जितनी जिम्मेदारी डीजे ऑपरेटर की होगी, उतनी ही आयोजक की भी मानी जाएगी।
कड़े दंड का प्रावधान: तीन गलतियों में करियर खत्म
ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए ‘थ्री-स्ट्राइक’ नियम का सुझाव दिया गया है:
- पहली बार: भारी आर्थिक दंड (जुर्माना)।
- दूसरी बार: डीजे उपकरण और वाहन की तत्काल जब्ती।
- तीसरी बार: ऑपरेटर का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करना और ब्लैकलिस्ट करना।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डीजे से निकलने वाली ‘लो फ्रीक्वेंसी’ की आवाजें न केवल बहरापन पैदा कर रही हैं, बल्कि बुजुर्गों में हृदय गति बढ़ने और छात्रों में एकाग्रता की कमी का मुख्य कारण बन रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने सरकार के इस संभावित कदम का स्वागत किया है।













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