उत्तर प्रदेश में खाली हो रही राज्यसभा की 10 सीटों में से समाजवादी पार्टी के पास सिर्फ एक सीट है। वह सीट अखिलेश यादव के चाचा रामगोपाल यादव की है। इस बार सपा को दो सीटें मिलेंगी। पहली सीट के लिए रामगोपाल यादव का नाम तय है। वे फिर से राज्यसभा जाएंगे। लेकिन दूसरी सीट पर किसको भेजा जाएगा? य़ह बड़ा सवाल इसलिए बन गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम नेता उम्मीद कर रहे हैं कि अखिलेश यादव इस बार किसी मुस्लिम को राज्यसभा भेजेंगे। अखिलेश यादव भी चाहते हैं कि किसी मुस्लिम को उम्मीदवार बनाएं लेकिन वे दूसरे नंबर पर मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं रखना चाहते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि दूसरे नंबर पर वे आलोक रंजन को उतारने का मन बना रहे हैं, जिनको पिछली बार लड़ाया था।
अखिलेश यादव ने 2024 के चुनाव में आलोक रंजन को तीसरा उम्मीदवार बनाया था। जया बच्चन और रामजीलाल सुमन पहले दो उम्मीदवार थे। दोनों जीत गए लेकिन आलोक रंजन हार गए थे। वे उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वे कायस्थ समुदाय से आते हैं। तभी यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर अखिलेश ने यादव और कायस्थ उम्मीदवार उतार दिया तो फिर उनके पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का क्या होगा? यह भी कहा जा रहा है कि पुराने नेता सलीम शेरवानी इस बार फिर तैयारी कर रहे हैं। अखिलेश ने उनको 2024 में टिकट नहीं दिया था तो वे नाराज हो गए थे और इस्तीफा दे दिया था। हालांकि अखिलेश ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। अब वे फिर पार्टी में सक्रिय हैं और टिकट के दावेदार हैं। लेकिन वे भी तीसरा उम्मीदवार नहीं बनना चाहते हैं। तभी अखिलेश यादव की दुविधा बढ़ी हुई है।














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