राँची : झारखंड विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष बुधवार को एक ऐतिहासिक और भावुक पल का गवाह बना। अवसर था गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शंकर सिंह वाघेला और झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की औपचारिक शिष्टाचार मुलाकात का। इस मुलाकात ने न केवल दो राज्यों के नेताओं को करीब लाया, बल्कि दशकों पुरानी संसदीय यादों को भी जीवंत कर दिया।
पुराने संसदीय दिनों की स्मृतियाँ
मुलाकात के दौरान राजनीतिक सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिला। श्री वाघेला ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ अपने पुराने संसदीय अनुभवों को साझा किया। बातचीत का मुख्य केंद्र वह दौर रहा जब भारतीय राजनीति के दिग्गज और ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन तथा शंकर सिंह वाघेला एक ही कार्यकाल में सांसद के रूप में देश की सेवा कर रहे थे।
एक यादगार उपहार: इतिहास के झरोखे से
इस मुलाकात का सबसे विशेष आकर्षण वह दुर्लभ तस्वीर रही, जिसे श्री वाघेला ने मुख्यमंत्री को सप्रेम भेंट किया।
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- तस्वीर का महत्व: यह तस्वीर उस समय की है जब शिबू सोरेन और शंकर सिंह वाघेला संसद में सहयोगी थे।
- भावनात्मक जुड़ाव: श्री वाघेला ने इसे ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व का बताते हुए अपनी साझा राजनीतिक यात्रा के कई अनछुए पहलुओं का जिक्र किया।
”यह तस्वीर केवल एक छवि नहीं, बल्कि उस दौर के संघर्ष और राजनीतिक मूल्यों का दस्तावेज है जब हम साथ मिलकर देश की नीति निर्धारण में भूमिका निभा रहे थे।” — शंकर सिंह वाघेला
मुख्यमंत्री ने जताया आभार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस अति विशिष्ट उपहार के लिए श्री वाघेला के प्रति गहरा आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह तस्वीर प्राप्त करना गौरव की बात है। मुख्यमंत्री के अनुसार:
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- यह तस्वीर उनके पिता की राजनीतिक यात्रा का एक अमूल्य हिस्सा है।
- यह झारखंड की राजनीतिक विरासत और लोकतांत्रिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण स्मृति है।
- ऐसे क्षण वर्तमान पीढ़ी के नेताओं को अपने पुरखों के योगदान की याद दिलाते हैं।
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उपस्थिति
इस सौहार्दपूर्ण बैठक के दौरान राज्य के वरिष्ठ नेता और विधायक श्री मथुरा प्रसाद महतो भी उपस्थित रहे। पूरे मिलन समारोह के दौरान माहौल अत्यंत आत्मीय रहा, जहाँ वर्तमान राजनीति के साथ-साथ पुराने दौर के मूल्यों पर भी चर्चा हुई।













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