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सरकार का ऑपरेशन नीट यूजी

भारत सरकार और भारतीय सेना इस समय ऑपरेशन सिंदूर से भी बड़े अभियान में लगी है। वह अभियान है नीट यूजी की परीक्षा कराना है। इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि भारतीय सेना और वायु सेना को इस पैमाने पर परीक्षा कराने के लिए शामिल किया गया हो। यह भी पहली बार है, जब कोई सरकार अपनी विफलता का इस स्तर पर विज्ञापन कर रही है। सरकार स्वीकार कर रही है पूरा शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा व्यवस्था का पूरा तंत्र साफ सुथरे तरीके से परीक्षा कराने में विफल है। इसलिए सेना को शामिल किया गया है और इसलिए प्रधानमंत्री को यानी उनके कार्यालय को सीधे पूरे मामले की मॉनिटरिंग करनी पड़ रही है। 23 लाख छात्रों वाली परीक्षा तीन मई को हुई थी और पेपर लीक के कारण रद्द हो गई थी। अब वही परीक्षा दोबारा 21 जून को हो रही है। इसे लेकर एनटीए की ओर से एक प्रेस बयान जारी हुआ है। सरकार मान रही है कि उससे छात्रों व अभिभावकों में विश्वास बनेगा लेकिन उसका उलटा हो रहा है।

जैसे उसमें कहा गया है कि परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने सोशल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को बंद कर दिया है। टेलीग्राम पर चलने वाले कई एजुकेशन समूह तो इससे परेशान हुए ही हैं लेकिन छात्रों में उलटे यह भय हुआ है किसी दूसरे ऐप पर पेपर लीक न हो जाए। यह सवाल भी है कि जब इतनी फुलप्रूफ व्यवस्था बनाई गई तो फिर पेपर कैसे लीक हो सकता है, जिसका खतरा एनटीए को दिख रहा है? कितनी सख्त व्यवस्था है उसे इस बात से समझिए की चार दिन में वायु सेना ने दो सौ उड़ानें भर कर 20 से ज्यादा जगहों पर प्रश्नपत्र पहुंचाएं हैं। वहां प्रश्नपत्र को रियल टाइम जीपीएस और डिजिटल लॉक वाले हाईटेक बॉक्स में रखा गया है। अगर इससे कोई भी छेड़छाड़ होगी तो तुरंत दिल्ली कंट्रोल रूम में अलर्ट होगा। वहां पर 24 घंटे सेना के जवानों की तैनाती है। सोचें, इसके बाद भी लग रहा है कि पेपर लीक हो सकता है इसलिए टेलीग्राम बंद कर दिया गया।

इस सुरक्षा के बाद छात्रों के परेशान होने की बारी है। छात्रों की परेशानी शुरू हो गई है। कई शिकायतें आई हैं कि छात्र एडमिट कार्ड नहीं डाउनलोड कर पा रहे हैं। एनटीए की ओर से कहा गया है कि इसे जल्दी ही ठीक कर लिया जाएगा। इसके बाद परीक्षा रद्द होने की वजह से मानसिक आघात झेल रहे छात्रों को परीक्षा केंद्र पर नई तरह की समस्याओं से रूबरू होना होगा। सरकार ने पहले ही परीक्षा केंद्र पर जांच की सख्त व्यवस्था की है लेकिन अब इसे तिगुना कर दिया गया है। छात्रों का फेशियल रिकग्निशन होगा और उच्च स्तरीय फ्रिशकिंग यानी शारीरिक जांच होगी। हवाईअड्डों पर होने वाली जांच से ज्यादा सख्त। इस तरह की जांच दो या तीन स्तर पर होगी। इसके बाद छात्रों को परीक्षा कक्ष में जाने दिया जाएगा। यह भी बताया गया है कि इस प्रक्रिया की निगरानी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से हो रही है। हालांकि इसके बाद भी न तो परीक्षा कराने वाली एजेंसी भरोसे में है और न छात्र व अभिभावक भरोसे में हैं कि इस बार परीक्षा ठीक तरीके से हो जाएगी और नतीजे भी ठीक तरीके से आ जाएंगे। क्योंकि परीक्षा में गड़बड़ी किसी भी स्तर पर हो सकती है। इस बीच एक अच्छी बात यह हुई है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर से फोकस हट गया है।

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