Advertisement

लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स 347 अंक उछला

हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसयू बैंक के शेयरों के समर्थन से निफ्टी50 और सेंसेक्स में 0.40 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। 

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 347.14 अंकों यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी 50 96.55 अंक या 0.40 प्रतिशत बढ़कर 24,085.70 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,808.48 से 271.61 अंक बढ़कर 77,080.09 पर खुला और दिन के कारोबार में 77,218.99 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,989.15 से 55.35 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,044.50 पर खुला और दिन के कारोबार में 24,108.20 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया।

व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मेटल ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिनमें 1-2 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑयल एंड गैस शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी एफएमसीजी में क्रमशः 0.62 प्रतिशत, 0.43 प्रतिशत और 0.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी 50 में, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एसबीआई लाइफ, एटर्नल, एचडीएफसी लाइफ और टाटा स्टील सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, सिप्ला, बजाज फिनसर्व, ओएनजीसी और एक्सिस बैंक के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक शांति समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की योजना से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ऊर्जा कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर के निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि फेड फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भविष्य की नीति को लेकर दिए जाने वाले संकेतों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। एशियाई बाजारों में भी हालिया तेजी जारी रही, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की संभावना से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा बढ़ा है।

Also Read : स्वाद और सेहत का खजाना है जंगल जलेबी

एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि निवेशकों के बढ़ते भरोसे का असर बाजार की अस्थिरता पर भी दिखाई दिया। इंडिया वीआईएक्स तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में अनिश्चितता और जोखिम की भावना में कमी का संकेत देता है। यह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं और तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 74-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रही हैं। वहीं घरेलू वायदा बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 7,100-7,200 रुपए के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए राहत भरी है, क्योंकि इससे आयात बिल कम होने, महंगाई पर नियंत्रण और समग्र आर्थिक स्थिति मजबूत होने की संभावना बढ़ती है।

उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक जोखिम कम होने और ऊर्जा कीमतों में नरमी के कारण भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। डॉलर-रुपया विनिमय दर लगभग 94.6 के स्तर पर कारोबार कर रही है। इससे महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने और भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन में सुधार की उम्मीद मजबूत हुई है।

एक्सपर्ट ने कहा कि निफ्टी 50 ने अपनी रिकवरी को आगे बढ़ाते हुए मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया और महत्वपूर्ण 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा। पूरे दिन बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। तकनीकी दृष्टि से अब 24,100 से 24,200 का दायरा निकटतम रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) क्षेत्र बनकर उभरा है। यदि निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो तेजी और मजबूत हो सकती है तथा इंडेक्स 24,400 के अगले महत्वपूर्ण लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है।

दूसरी ओर, 24,000 का स्तर अब मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। हालांकि, यदि निफ्टी 23,900 के नीचे फिसलता है, तो हल्की मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है और इंडेक्स 23,800 के सपोर्ट क्षेत्र तक आ सकता है। फिलहाल तकनीकी संकेतक सकारात्मक बने हुए हैं और 24,000 के ऊपर बने रहने तक बाजार में तेजी का रुख कायम रहने की संभावना है। वहीं, इस स्तर के नीचे कमजोरी आने पर कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन या सीमित मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया की प्रगति पर रहेगा। हाल के महीनों में मध्य-पूर्व संकट के कारण ऊर्जा कीमतों में उछाल आया था, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ा। ऐसे में फेड की आगे की रणनीति वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हालांकि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से बाजार को मजबूत समर्थन मिला है, लेकिन लंबी अवधि की स्थिर तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका-ईरान समझौता कितनी सफलतापूर्वक लागू होता है और ऊर्जा बाजार कितनी तेजी से सामान्य स्थिति में लौटते हैं। जब तक इन दोनों मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार भू-राजनीतिक खबरों के प्रति संवेदनशील बना रह सकता है।

Pic Credit : ANI

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright 2026. All right reserved. Loktantra TV News Website Design by E- MEDIA Web & App - 7999906109
error: Content is protected !!