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अल्पसंख्यक मंत्रियों की संख्या कम होगी

नरेंद्र मोदी की सरकार में कई सालों से कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है। देश की करीब 15 फीसदी आबादी का सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं है। वैसे भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में किसी मुस्लिम को लोकसभा की टिकट भी नहीं दी थी। राज्यसभा में भी कोई मुस्लिम नहीं है। इससे पहले एमजे अकबर और मुख्तार अब्बास नकवी मंत्री थे लेकिन दोनों बारी बारी से सरकार से बाहर हो गए। दोनों की राज्यसभा की सदस्यता गई तो फिर नहीं मिली। अब ऐसा लग रहा है कि सरकार में ईसाई मंत्री भी नहीं रहेंगे। केरल के रहने वाले जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। लेकिन उनको मध्य प्रदेश से इस बार राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। ऐसा लग रहा है कि भाजपा ने उनको रिटायर करने की तैयारी कर ली है। वे नरेंद्र मोदी की सरकार में इकलौते ईसाई मंत्री हैं। अगर उनको राज्यसभा नहीं मिलती है तो वे सरकार से बाहर हो जाएंगे। उनसे पहले केजे अल्फोंस मंत्री थे लेकिन उनको भी फिर से राज्यसभा नहीं मिल पाई थी।

मुस्लिम और ईसाई दो सबसे बड़े अल्पसंख्यक समूह हैं, जो सरकार से बाहर हो सकते हैं। इस बीच यह भी सवाल है कि क्या सिख मंत्रियों की संख्या भी कम होगी। अभी रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा हरदीप सिंह पुरी भी मोदी सरकार में मंत्री हैं। वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में आते हैं। इस साल नवंबर में उनका भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके ऊपर पिछले कुछ महीनों में अनेक आरोप लगे हैं। एपस्टीन फाइल्स में उनका नाम आया है, जिसे विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बनाया है। बहरहाल, एक सिख मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा नहीं मिली है और वे पंजाब में विधानसभा का चुनाव लडेंगे। अगर पुरी का रिन्यूअल इस साल नहीं होना है तो इसका अर्थ है कि किसी और सिख को पहले ही मंत्रिमंडल में शामिल करना होगा। वह कौन होगा इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। वैसे तो जैन और बौद्ध भी अल्पसंख्यक होते हैं लेकिन उनको हिंदू समाज अपने से अलग नहीं मानता है।

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