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वाह! सूर्यवंशी की बल्लेबाजी – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

धरोहर मान लिए गए सूर्यवंशी शारीरिक व मानसिक तौर पर सुदृढ़, निडर व परिपक्क ही लगे। शुरुआती दौर में देखने पर लगता था कि वैभव खास लप्पेबाज हैं जो किस्मत के भरोसे खेलना चाहते हैं। गेंद को बस उठाकर या उड़ाकर ही मारना चाहते हैं। मगर उनमें लगातार लड़कपन की लय से भरा आत्मविश्वास झलकता था।

सबका हैरान होना स्वभाविक है। सचमुच सवाल है कि कैसे एक पन्द्रह-सोलह साल का बच्चा दिग्गज महान तेज गेंदबाजों को बेधड़क छक्के-चौके मार रहा है।

खास उन्नीसवें आईपीएल में बंगलोर ने गुजरात को फाइनल में हराकर लगातार दूसरी बार खिताब जीता। लेकिन राजस्थान के शुरुआती बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का ही जयगान होता रहा। वे चमके, और सभी को चमकाते रहे। सारा गुणगान सूर्यवंशी की प्रतिभा, क्षमता और वैभव का ही गाया गया। क्रिकेट प्रेमी सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर वैभव सूर्यवंशी किस मिट्टी के बने हैं? इस मार्च में पन्द्रह साल पूरे करने वाले वैभव की अद्भुत, अकल्पनीय प्रतिभा व क्षमता का रहस्य क्या है? क्या सूर्यवंशी में भी ईश-अंश है?

सूर्यवंशी के वैभव की चमक इस आईपीएल पर छायी रही। 16 पारियां में सूर्यवंशी ने लगभग 50 रन प्रति पारी की औसत से 776 रन बनाए। कुल 16 पारी में प्रति पारी 4.5 छक्के मारते हुए 72 छक्कों का आंखे खुली छोड़ देने जैसा कीर्तिमान बनाया। हर 1 गेंद पर 2.37 रन बनाने की बल्लेबाजी क्षमता रही। एक बार सबसे तेज शतक बनाने से चूके तो दूसरा सबसे तेज आईपीएल शतक बनाया। सबसे कम उम्र में सबसे तेजी से हजार रन बनाने वाले भी वैभव ही हैं। छोटी सी उम्र में इतने सारे विशाल, महान कीर्तिमान उनके नाम हो गए हैं। आखिर वैभव में मन की दृढ़ता के अलावा ऐसा क्या है जो उन्हें बल्लेबाजी का सूर्यवंशी बनाता है?

यह तो अब सभी जान गए हैं कि माता-पिता ने वैभव को पालने में झूलने के समय पर ही बाईस गज की फील्ड पर उतार दिया था। झुनझुने की जगह बल्ला थमा दिया था। गोदी में घूमने के समय पर बल्ला घुमाना सिख रहे थे। पांव रखने, साधने से पहले दौड़ना शुरू हो गया था। स्कूल पढ़ाई के समय पर क्रिकेट की कोचिंग हो रही थी। यह और ऐसा ही बहुत कुछ तो तमाम माता-पिता सचिन तेंदुलकर के छोटी उम्र में भारत के लिए खेलने के समय से ही करते आ रहे हैं। माता-पिता के समर्पण व त्याग की अनंत गाथाएं हैं। सभी की कोशिश पूत के पांव पालने में ही दिखने की रही। लेकिन वैभव में इस सब के अलावा भी खास है जो उन्हें सूर्यवंशी बनाता है।

धरोहर मान लिए गए सूर्यवंशी शारीरिक व मानसिक तौर पर सुदृढ़, निडर व परिपक्क ही लगे। और उनके बल्ले की चाल खास ही दिखी। दो-तीन साल से उनका नाम खूब लिया जा रहा था। वे अंडर-19 विश्व कप खेले। राहुल द्रविड ने उनको राजस्थान के लिए खरीदा। शुरुआती दौर में देखने पर लगता था कि वैभव खास लप्पेबाज हैं जो किस्मत के भरोसे खेलना चाहते हैं। गेंद को बस उठाकर या उड़ाकर ही मारना चाहते हैं। मगर उनमें लगातार लड़कपन की लय से भरा आत्मविश्वास झलकता था।

वैभव के बल्ले के जोरदार, पूरे गोल घुमाव के कारण जो लोच, ऊर्जा व ताकत आती है वह खास है। उस पर बल्ले-हाथ की जुगलबंदी उनको लगातार शॉट खेलने के लिए उकसाती है। गेंद की दिशा व टप्पे का अंदाजा उनको पहले से अच्छा लग जाता है। गेंद-बल्ले का मिलन, यानी टाइमिंग और ताकत उनकी बल्लेबाजी में साफ दिखती है।

अभी वैभव को भारत के लिए खेलना है। बीसमबीस के अलावा एकदिवसीय और टेस्ट भी खेलना है। वैभव सूर्यवंशी खुद भी मानते हैं की उन पर भगवान का आशीर्वाद है। और सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने कह ही दिया है कि वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट को भगवान की देन हैं।

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