विपक्षी पार्टियों को इसका अंदाजा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल लाना चाहती है। संविधान के 131वें संशोधन बिल के जरिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करना चाहती है और सीटें बढ़ा कर 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना चाहती है। विपक्ष ने पिछली बार इसे रोक दिया था। अब नए सिरे से विपक्ष को भी हिसाब बैठाना है। आगे की राजनीति और भाजपा से मुकाबले की रणनीति बनाने के लिए विपक्षी पार्टियों की बैठक आठ जून को होगी। गौरतलब है कि पांच राज्यों के चुनावों के तुरंत बाद बैठक की योजना थी। कहा जा रहा था कि चार मई को नतीजे आने के तुरंत बाद बैठक होगी। उस समय तक तृणमूल कांग्रेस और डीएमके दोनों जीत के प्रति आश्वस्त थे। लेकिन नतीजे आए तो सब उलटा पुलटा हो गया। दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद प्रस्तावित बैठक टल गई। इस बैठक की योजना इसलिए बनी थी कि अप्रैल के विशेष सत्र में बनी विपक्षी एकजुटता को मजबूत किया जाए।
लेकिन अब जो बैठक होगी उसमें एकजुटता की कमी दिखाई देगी। डीएमके इस बैठक में शामिल नहीं होगी। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस शामिल होगी लेकिन टीएमसी और कांग्रेस के बीच पहले से बना अविश्वास बहुत गहरा है। राहुल गांधी भले अभी ममता बनर्जी के प्रति सद्भाव दिखा रहे हैं लेकिन बंगाल चुनाव के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी को नुकसान पहुंचाने वाले बयान दिए थे। ममता बनर्जी का मनोबल वैसे भी बहुत गिरा हुआ है। समाजवादी पार्टी, राजद, जेएमएम, उद्धव ठाकरे की शिव सेना, शरद पवार की एनसीपी आदि बैठक में शामिल होंगे। लेकिन ‘इंडिया’ ब्लॉक की पहले की बैठकों के मुकाबले इस बार माहौल बदला हुआ है। इस बार कमान पूरी तरह से कांग्रेस के हाथ में होगी। वैसे भी कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ही विपक्षी पार्टियों से समन्वय बना रहे हैं। कुल मिला कर कह सकते हैं कि बदले हुए हालात में अपने आप विपक्ष की कमान घूम कर कांग्रेस के हाथ में पहुंच गई है।

















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